एसआईआर के दौरान लखनऊ, गाजियाबाद में सबसे अधिक मतदाताओं के नाम मसौदा सूची से हटे

एसआईआर के दौरान लखनऊ, गाजियाबाद में सबसे अधिक मतदाताओं के नाम मसौदा सूची से हटे

लखनऊ, 7 जनवरी । उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान लखनऊ, गाजियाबाद, बलरामपुर और कानपुर नगर उन जिलों में शामिल रहे, जहां सबसे अधिक मतदाताओं के फॉर्म जमा नहीं हो सके और उनके नाम मसौदा मतदाता सूची से हटा दिए गए। यह जानकारी जिला-वार जारी आधिकारिक आंकड़ों से सामने आई है।

राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) नवदीप रिणवा ने बताया कि एसआईआर के बाद मंगलवार को प्रकाशित मसौदा मतदाता सूची से 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जबकि 12.55 करोड़ मतदाताओं को सूची में बरकरार रखा गया है। उन्होंने कहा कि पहले सूचीबद्ध 15.44 करोड़ मतदाताओं में से 2.89 करोड़ मतदाता मृत्यु, स्थायी पलायन या एक से अधिक स्थानों पर पंजीकरण जैसे कारणों से मसौदा सूची में शामिल नहीं हो सके।

छह जनवरी को जारी जिला-वार आंकड़ों के अनुसार, लखनऊ 30.04 प्रतिशत बिना जमा हुए फॉर्म के साथ राज्य में पहले स्थान पर रहा। यहां लगभग 12 लाख मतदाताओं के फॉर्म जमा नहीं हुए। जिले में मतदाताओं की संख्या अक्टूबर 2025 में 39.94 लाख थी, जो संशोधित मसौदा सूची में घटकर 27.94 लाख रह गई। इनमें 1.28 लाख मृत्यु से जुड़े मामले, 4.28 लाख लापता या अनुपस्थित मतदाता और 5.36 लाख स्थायी स्थानांतरण से जुड़े मामले शामिल हैं।

गाजियाबाद में 28.83 प्रतिशत फॉर्म जमा नहीं हुए, जो लगभग 5.83 लाख मतदाताओं के बराबर हैं। जिले के कुल मतदाता 28.38 लाख से घटकर 20.20 लाख रह गए। इनमें करीब 64 हजार मृत्यु के मामले, 3.20 लाख लापता या अनुपस्थित मतदाता और 3.60 लाख स्थायी स्थानांतरण से जुड़े मामले दर्ज किए गए हैं।

आंकड़ों के अनुसार, बलरामपुर 25.98 प्रतिशत बिना जमा हुए फॉर्म के साथ तीसरे स्थान पर रहा, जहां लगभग 4.11 लाख मतदाता मसौदा सूची से बाहर हो गए। जिले में मतदाताओं की संख्या 15.83 लाख से घटकर 11.18 लाख हो गई। इनमें करीब 63 हजार मृत्यु, 1.60 लाख लापता या अनुपस्थित और 1.33 लाख स्थायी स्थानांतरण से जुड़े मामले शामिल हैं।

कानपुर नगर में 25.50 प्रतिशत फॉर्म जमा नहीं हुए, जिससे लगभग 9.02 लाख मतदाता सूची से बाहर हो गए। यहां मतदाताओं की संख्या 35.38 लाख से घटकर 26.36 लाख रह गई। आंकड़ों में करीब 1.04 लाख मृत्यु, 3.10 लाख लापता या अनुपस्थित और 3.92 लाख स्थायी स्थानांतरण के मामले दर्ज हैं।

प्रयागराज में 24.64 प्रतिशत फॉर्म जमा नहीं हुए, जो लगभग 11.56 लाख मतदाताओं के बराबर है। जिले के कुल मतदाता 46.93 लाख से घटकर 35.37 लाख रह गए। इनमें 1.74 लाख मृत्यु, 3.67 लाख लापता या अनुपस्थित और 4.89 लाख स्थायी स्थानांतरण से जुड़े मामले शामिल हैं।

गौतमबुद्ध नगर में 23.98 प्रतिशत फॉर्म जमा नहीं हुए, यानी लगभग 4.47 लाख मतदाता, जबकि आगरा में 23.25 प्रतिशत फॉर्म जमा नहीं होने के कारण करीब 8.37 लाख मतदाता मसौदा सूची से बाहर हो गए।

अन्य प्रमुख जिलों में वाराणसी में 18.18 प्रतिशत, गोरखपुर में 17.61 प्रतिशत, रायबरेली में 16.35 प्रतिशत, अमेठी में 18.60 प्रतिशत, इटावा में 18.95 प्रतिशत, कन्नौज में 21.57 प्रतिशत, सहारनपुर में 16.37 प्रतिशत, मुजफ्फरनगर में 16.29 प्रतिशत, अलीगढ़ में 18.60 प्रतिशत और मथुरा में 19.19 प्रतिशत फॉर्म जमा नहीं हो सके।

वहीं बुंदेलखंड क्षेत्र के जिलों में सबसे कम नाम हटाए गए। ललितपुर में 9.95 प्रतिशत फॉर्म जमा नहीं हुए, जबकि हमीरपुर (10.78 प्रतिशत), महोबा (12.42 प्रतिशत), बांदा (13 प्रतिशत), चित्रकूट (13.67 प्रतिशत) और झांसी (13.92 प्रतिशत) भी निचले पायदान पर रहे।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने स्पष्ट किया कि ये आंकड़े मसौदा मतदाता सूची पर आधारित हैं। छह फरवरी तक दावे और आपत्तियां दर्ज की जा सकती हैं, जिसके बाद आवश्यक संशोधन किए जाएंगे। अंतिम मतदाता सूची छह मार्च को प्रकाशित की जाएगी।

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