महिला आरक्षण कानून पर सर्वदलीय बैठक की मांग, खरगे ने पीएम की अध्यक्षता में चर्चा का दिया सुझाव

नई दिल्ली, 17 मार्च। महिला आरक्षण अधिनियम के क्रियान्वयन को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने संसदीय कार्य मंत्री किरण रीजीजू को पत्र लिखकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में जल्द सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है।

खरगे ने अपने पत्र में कहा कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ सितंबर 2023 में संसद द्वारा सर्वसम्मति से पारित किया गया था, लेकिन करीब 30 महीने बाद भी इसके क्रियान्वयन की स्पष्ट रूपरेखा सामने नहीं आई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधन को लागू करने के तौर-तरीकों पर सभी राजनीतिक दलों के साथ व्यापक चर्चा होनी चाहिए।

कांग्रेस अध्यक्ष ने बताया कि इस मुद्दे पर पहले भी उनकी रीजीजू से बातचीत हो चुकी है और पार्टी का स्पष्ट मत है कि सरकार को एक औपचारिक सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसी बैठक संसदीय लोकतंत्र की सर्वोत्तम परंपराओं के अनुरूप होगी और इससे सहमति आधारित रास्ता निकल सकेगा।

इस बीच, सूत्रों के मुताबिक सरकार महिला आरक्षण कानून को लागू करने के विकल्पों पर विचार कर रही है। मौजूदा प्रावधानों के अनुसार, लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण परिसीमन प्रक्रिया के बाद ही लागू होना है, जो अगली जनगणना के आधार पर होगी।

हालांकि, यह भी चर्चा में है कि सरकार परिसीमन से पहले ही इस कानून को लागू करने की संभावना तलाश रही है। अगर ऐसा होता है, तो इसके लिए संविधान में एक और संशोधन करना पड़ सकता है।

गौरतलब है कि 106वें संविधान संशोधन के तहत पारित इस कानून में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रावधान किया गया है। अब इस कानून के वास्तविक क्रियान्वयन को लेकर राजनीतिक सहमति और प्रक्रिया तय होना बाकी है।

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