लखनऊ, 25 मार्च 2026 (यूएनएस)। राजधानी लखनऊ के निशातगंज स्थित एससीईआरटी (राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद) कार्यालय परिसर के बाहर बुधवार को जूनियर एडेड शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया में पदों की संख्या लगातार घटाए जाने और नियुक्ति में देरी को लेकर नाराजगी जताई।
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना था कि पहले करीब 1900 पदों पर वैकेंसी निकाली गई थी, जिसे परीक्षा से पहले घटाकर 1200 पद कर दिया गया और अब रिजल्ट के बाद इसे घटाकर लगभग 600 पद ही किया जा रहा है। उनका कहना है कि उन्होंने परीक्षा पास की, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन भी पूरा हो गया और परिवार को खुशखबरी भी दे दी, लेकिन अब तक नियुक्ति नहीं हो सकी है।
अभ्यर्थियों के अनुसार, 1 जनवरी 2021 को कुल 1894 पदों पर भर्ती निकाली गई थी, जिसे बाद में संशोधित कर 1262 पदों के लिए कर दिया गया। इस भर्ती की परीक्षा 17 अक्टूबर 2021 को प्रदेशभर में आयोजित की गई थी, जिसमें करीब 3 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए थे। इनमें से 42 हजार से अधिक अभ्यर्थी सफल हुए थे। 6 सितंबर 2022 को परिणाम घोषित होने के बाद दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई थी।
अभ्यर्थियों का कहना है कि 1262 सहायक अध्यापक पदों और 253 प्रधानाध्यापक पदों की भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद उच्च न्यायालय से वैकेंसी पर रोक लग गई, जिसके कारण नियुक्ति अटक गई। अब पदों की संख्या घटाकर केवल 634 पदों पर नियुक्ति की बात कही जा रही है, जिससे बड़ी संख्या में अभ्यर्थी बाहर हो रहे हैं।
रायबरेली से आए अभ्यर्थी जितेंद्र पाल ने कहा कि वे पिछले पांच वर्षों से नौकरी के लिए भटक रहे हैं। उनका आरोप है कि जिस मामले के कारण उच्च न्यायालय ने रोक लगाई, वह 2013 से सरकार के संज्ञान में था, फिर भी 2021 में विवादित स्कूलों को भर्ती प्रक्रिया में शामिल किया गया। उन्होंने कहा कि विभाग और सरकार की लापरवाही का खामियाजा अभ्यर्थियों को भुगतना पड़ रहा है।
देवरिया से आए अभ्यर्थी देवेश पांडे ने कहा कि वे 2021 से नौकरी के लिए संघर्ष कर रहे हैं और बार-बार पदों की संख्या घटाए जाने से उनका भविष्य अधर में लटक गया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने भर्ती के सभी मापदंड पूरे किए हैं, लेकिन विभाग की गलतियों के कारण उन्हें परेशानी उठानी पड़ रही है।
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द नियुक्ति नहीं दी गई तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे। उनका कहना है कि लगातार देरी और नियमों में बदलाव से युवाओं में निराशा बढ़ रही है और सरकार को जल्द इस समस्या का समाधान करना चाहिए।
