जम्मू, 4 अप्रैल (UNS)। जम्मू कश्मीर विधानसभा ने शनिवार को निजी विश्वविद्यालय विधेयक पारित कर दिया, जिसमें केंद्र शासित प्रदेश में निजी संस्थानों की स्थापना के प्रावधान किए गए हैं।
शिक्षा मंत्री सकीना इटू द्वारा पेश किए गए विधेयक में कहा गया है कि इसका उद्देश्य जम्मू कश्मीर में निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना को सक्षम बनाना, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना तथा छात्रों के हितों की रक्षा के लिए संस्थानों के कामकाज, प्रबंधन और शैक्षणिक मानकों को विनियमित करना है।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधेयक के पारित होने पर इटू और सभी हितधारकों को बधाई देते हुए इसे केंद्र शासित प्रदेश के युवाओं के लिए एक “मील का पत्थर” बताया।
सदन में चर्चा के दौरान शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार ने विधेयक तैयार करने से पहले उच्च शिक्षा क्षेत्र से जुड़े सभी मुद्दों और चिंताओं को ध्यान में रखा है। उन्होंने कहा कि यह पहल जम्मू कश्मीर में उच्च शिक्षा क्षेत्र को बढ़ावा देगी और छात्रों को राज्य से बाहर जाकर पढ़ाई करने की आवश्यकता कम होगी।
विधायक मीर सैफुल्ला, निजामुद्दीन भट, पीरजादा फारूक अहमद शाह और तनवीर सादिक ने विधेयक पर संशोधन प्रस्तावित किए थे, लेकिन सरकार से आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने अपने संशोधन वापस ले लिए। विधायक बलवंत सिंह मनकोटिया द्वारा पेश किया गया एक संशोधन ध्वनि मत से खारिज कर दिया गया।
सदन ने इसके साथ ही जम्मू कश्मीर जन विश्वास द्वितीय (प्रावधानों का संशोधन) विधेयक भी पारित किया, जिसे मुख्यमंत्री की ओर से कृषि मंत्री जावेद अहमद डार ने चर्चा और पारित करने के लिए प्रस्तुत किया था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि निजी विश्वविद्यालय विधेयक जम्मू कश्मीर के युवाओं के उज्ज्वल भविष्य को आकार देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह निर्णय शैक्षणिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, नवाचार को बढ़ावा देने तथा सीखने और अनुसंधान के लिए अनुकूल वातावरण बनाने के प्रति नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
