ईरान ने समूचे पश्चिम एशिया में लक्ष्यों पर हमले किए, इजराइल-अमेरिका ने तेहरान को बनाया निशाना

दुबई, तीन अप्रैल (UNS)। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध ने शुक्रवार को और खतरनाक रूप ले लिया, जब ईरान ने क्षेत्र के कई रणनीतिक ठिकानों पर हमले किए। इसके जवाब में इजराइल और संयुक्त राज्य अमेरिका ने हवाई हमले कर ईरान की राजधानी तेहरान को निशाना बनाया। इस संघर्ष को शुरू हुए लगभग पांच सप्ताह हो चुके हैं और क्षेत्रीय तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

ईरान के हमलों में कुवैत के एक प्रमुख तेल रिफाइनरी परिसर और समुद्री पानी को पेयजल में बदलने वाले विलवणीकरण संयंत्र को नुकसान पहुंचा है। कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन के अनुसार, दमकलकर्मी कई स्थानों पर लगी आग पर काबू पाने की कोशिश कर रहे हैं। खाड़ी देशों के लिए ऐसे संयंत्र बेहद महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इन्हीं के माध्यम से अधिकांश पेयजल की आपूर्ति होती है।

ऊर्जा ढांचे पर हमले से बढ़ी वैश्विक चिंता

ईरान के हमलों का असर केवल सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि क्षेत्र के ऊर्जा ढांचे पर भी पड़ा है। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की मजबूत पकड़ ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता पैदा कर दी है। शांतिकाल में दुनिया के तेल और प्राकृतिक गैस परिवहन का लगभग पांचवां हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है, इसलिए यहां किसी भी प्रकार की बाधा वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर डाल सकती है।

सऊदी अरब ने दावा किया है कि उसने ईरान के कई ड्रोन मार गिराए हैं, जबकि संयुक्त अरब अमीरात ने एक गैस क्षेत्र को अस्थायी रूप से बंद कर दिया, क्योंकि मिसाइल के मलबे से वहां आग लग गई थी। वहीं बहरीन में भी सायरन बजने की खबरें सामने आई हैं।

बातचीत के संकेत, लेकिन युद्ध जारी

इस बीच, ईरान के पूर्व विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद जरीफ ने एक प्रभावशाली अमेरिकी पत्रिका में लेख लिखकर संघर्ष समाप्त करने का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक चलने वाली शत्रुता से जान-माल की भारी हानि होगी और इससे मौजूदा गतिरोध का समाधान नहीं निकलेगा।

जरीफ ने सुझाव दिया कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर सीमाएं लगाने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का प्रस्ताव दे सकता है, जिसके बदले में उस पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध हटाए जा सकते हैं। उल्लेखनीय है कि उन्होंने ही वर्ष 2015 के परमाणु समझौते की वार्ताओं में अहम भूमिका निभाई थी।

बढ़ता मानवीय संकट

युद्ध के दौरान अब तक ईरान में 1,900 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि इजराइल में 19 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई है। खाड़ी देशों और कब्जे वाले वेस्ट बैंक में भी दो दर्जन से अधिक लोगों की जान गई है। इसके अलावा, हिज्बुल्ला के खिलाफ इजराइल के जमीनी अभियान में लेबनान में 1,300 से अधिक लोग मारे गए हैं और लगभग 10 लाख लोग बेघर हो चुके हैं।

संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव पर नजर

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में शनिवार को एक प्रस्ताव पर मतदान होने की संभावना है, जिसका उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों के सुरक्षित आवागमन को सुनिश्चित करना है। हालांकि रूस, चीन और फ्रांस जैसे वीटो शक्ति वाले देशों ने सैन्य बल के इस्तेमाल की अनुमति देने वाले प्रावधान पर आपत्ति जताई है।

इस बीच, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, खाद्य कीमतों और क्षेत्रीय सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ने की आशंका बनी हुई है।

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