नई दिल्ली, 10 मार्च । मनीष तिवारी ने मंगलवार को लोकसभा में कहा कि संविधान के तहत सांसदों को विशेष अधिकार प्राप्त हैं और सदन में किसी भी सदस्य की अभिव्यक्ति की आजादी पर आसन भी रोक नहीं लगा सकता।
कांग्रेस सांसद तिवारी ने यह टिप्पणी ओम बिरला को लोकसभा अध्यक्ष पद से हटाने के लिए विपक्ष द्वारा लाए गए प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान की। विपक्ष ने आरोप लगाया है कि अध्यक्ष ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा में बोलने की अनुमति नहीं दी और सदन की कार्यवाही में पक्षपात किया।
तिवारी ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 105 के तहत सांसदों को विशेष दर्जा प्राप्त है और इसी के तहत उन्हें सदन में बोलने और अपनी बात रखने की पूर्ण स्वतंत्रता दी गई है। उन्होंने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को संविधान में कोई विशेष दर्जा नहीं दिया गया है और उनकी भूमिका केवल सदन की कार्यवाही का संचालन करने की है।
उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष को कानून में वैधानिक दर्जा प्राप्त है और पहले ऐसी परंपरा रही है कि यदि नेता प्रतिपक्ष संकेत भी कर देते थे तो उनका माइक चालू कर दिया जाता था और उन्हें बोलने का अवसर दिया जाता था। लेकिन राहुल गांधी को बोलने नहीं देना उनकी अभिव्यक्ति की आजादी पर रोक लगाने जैसा है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि संविधान के अनुच्छेद 93 में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चयन का उल्लेख है, लेकिन पिछले सात वर्षों से लोकसभा में उपाध्यक्ष का पद खाली है और सरकार ने इस बारे में कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया है।
तिवारी ने कहा कि यदि संविधान की मर्यादाओं के साथ इस प्रकार खिलवाड़ किया जाएगा तो इसका लोकतांत्रिक व्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं बल्कि संसदीय संस्थाओं के बेहतर संचालन और लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत करने के उद्देश्य से लाया गया है।
