पशुधन मंत्री ने 14 जनपदों में 18 वृहद गोसंरक्षण केंद्रों का किया लोकार्पण


प्रत्येक केंद्र में 400 गोवंश संरक्षण की क्षमता, गुणवत्ता से समझौता नहीं—धर्मपाल सिंह

लखनऊ, 22 जनवरी 2026। उत्तर प्रदेश के पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने गुरुवार को पशुपालन निदेशालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के 14 जनपदों में नवनिर्मित 18 वृहद गोसंरक्षण केंद्रों का वर्चुअल लोकार्पण किया। इन केंद्रों के निर्माण पर कुल 28 करोड़ 82 लाख रुपये की लागत आई है तथा प्रत्येक केंद्र में लगभग 400 गोवंश को संरक्षित करने की क्षमता है।

लोकार्पण किए गए केंद्रों में मिर्जापुर में तीन, बरेली और कानपुर देहात में दो-दो तथा आजमगढ़, कासगंज, उन्नाव, बुलंदशहर, श्रावस्ती, अंबेडकरनगर, बाराबंकी, सुलतानपुर, फिरोजाबाद, रायबरेली और बदायूं में एक-एक वृहद गोसंरक्षण केंद्र शामिल हैं। सभी केंद्रों का निर्माण कार्य शत-प्रतिशत पूर्ण कर लिया गया है।

इस अवसर पर मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री के दिशा-निर्देशन में प्रदेश सरकार निराश्रित गोवंश के संरक्षण, संवर्धन और भरण-पोषण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गोसंरक्षण केंद्रों के निर्माण में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और गोआश्रय स्थलों में चारा, भूसा, प्रकाश, स्वच्छता और दवाइयों की समुचित व्यवस्था अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाए।

मंत्री ने संबंधित जनपदों के ग्राम प्रधानों, मुख्य पशु चिकित्साधिकारियों और केयरटेकरों से संवाद करते हुए कहा कि गोसंरक्षण के कार्यों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और समाज की सहभागिता आवश्यक है। उन्होंने निर्देश दिए कि गोशालाओं में किसी भी स्थिति में गोवंश भूखा न रहे।

 सिंह ने बताया कि प्रदेश में अब तक 630 वृहद गोसंरक्षण केंद्रों की स्वीकृति दी जा चुकी है, जिनमें से 421 का निर्माण पूर्ण हो चुका है और 410 केंद्र क्रियाशील हैं। प्रत्येक वृहद गोसंरक्षण केंद्र की निर्माण लागत 160.12 लाख रुपये निर्धारित है। राज्य में 0.5 हेक्टेयर भूमि पर स्थायी गोआश्रय स्थल विकसित किए जा रहे हैं। निराश्रित गोवंश के भरण-पोषण हेतु दिसंबर 2025 तक शत-प्रतिशत अनुदान राशि डीबीटी के माध्यम से जारी की जा चुकी है।

वर्तमान में प्रदेश के 6,503 अस्थायी गोआश्रय स्थल, 421 वृहद गोसंरक्षण केंद्र, 259 कांजी हाउस और शहरी क्षेत्रों में 314 कान्हा गोआश्रय स्थलों सहित कुल 7,497 गोआश्रय स्थलों में 12,38,447 निराश्रित गोवंश संरक्षित हैं। मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के तहत 1,13,631 लाभार्थियों को 1,81,418 गोवंश सुपुर्द किए जा चुके हैं। गोवंश संरक्षण और सहभागिता योजना पर प्रतिदिन लगभग 6.5 करोड़ रुपये व्यय किए जा रहे हैं।

कार्यक्रम के दौरान पशुधन मंत्री ने 22 जनवरी से 8 मार्च 2026 तक संचालित होने वाले राष्ट्रीय खुरपका-मुंहपका रोग नियंत्रण अभियान के सातवें चरण (2025-26) का भी शुभारंभ किया।

उन्होंने कहा कि गोआश्रय स्थलों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए गोबर से गोदीप, धूपबत्ती, गो-लॉग, गमले, वर्मी कम्पोस्ट और सीबीजी उत्पादन इकाइयों की स्थापना की जा रही है, जिनमें महिला स्वयं सहायता समूहों की महत्वपूर्ण भूमिका है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं।

कार्यक्रम में पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश कुमार मेश्राम ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे नियमित रूप से गोसंरक्षण केंद्रों का निरीक्षण करें और किसी भी प्रकार की लापरवाही न होने दें। इस अवसर पर विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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