राम मंदिर दान राशि गबन मामला: प्राथमिकी न होने पर उठे सवाल, जांच के लिए आज अयोध्या पहुंचेगी SIT

अयोध्या/लखनऊ, 15 जून (RNN)। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी और धन के दुरुपयोग के आरोपों को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि कथित अनियमितताओं के संकेत और आंतरिक जांच में कुछ तथ्य सामने आने के बावजूद अब तक पुलिस में प्राथमिकी क्यों दर्ज नहीं कराई गई। इस बीच उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल ( SIT ) सोमवार से अयोध्या में जांच शुरू करेगा।

मंदिर के चढ़ावे से जुड़े इस प्रकरण के सामने आने के बाद से ट्रस्ट की ओर से आंतरिक स्तर पर जांच की जा रही है। सूत्रों के अनुसार कुछ संदिग्धों से पूछताछ और धनराशि की बरामदगी की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि इन दावों के बावजूद अब तक किसी थाने में औपचारिक प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई गई है, जिससे कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं।

प्राथमिकी नहीं, यही सबसे बड़ा सवाल

मामले में आलोचकों और विपक्षी दलों का कहना है कि यदि धन के दुरुपयोग या गबन के प्राथमिक साक्ष्य मिले हैं तो कानून के अनुसार प्राथमिकी दर्ज कर जांच आगे बढ़नी चाहिए थी। उनका तर्क है कि विशेष जांच दल की जांच और आपराधिक मामला साथ-साथ चल सकते थे।

दूसरी ओर ट्रस्ट की ओर से अब तक इस संबंध में कोई विस्तृत सार्वजनिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। ट्रस्ट के कई प्रमुख पदाधिकारी भी मीडिया से दूरी बनाए हुए हैं, जिससे अटकलों का दौर तेज हो गया है।

जांच के लिए गठित हुआ तीन सदस्यीय विशेष जांच दल

प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री के निर्देश पर तीन सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन किया गया है। इसमें लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, लखनऊ परिक्षेत्र की पुलिस महानिरीक्षक किरन एस तथा वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन को शामिल किया गया है।

सूत्रों के अनुसार विशेष जांच दल सोमवार को अयोध्या पहुंचकर जांच शुरू करेगा। दल ट्रस्ट के पदाधिकारियों, कर्मचारियों तथा चिन्हित संदिग्धों से पूछताछ कर अब तक हुई आंतरिक जांच का पूरा ब्यौरा जुटाएगा। साथ ही दान राशि के संग्रह, गणना और सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा करेगा।

केवल धन के लेन-देन नहीं, जवाबदेही की भी होगी जांच

सूत्रों का दावा है कि विशेष जांच दल केवल धन के लेन-देन की जांच तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह भी पता लगाएगा कि किसी स्तर पर संरक्षण, लापरवाही या मिलीभगत तो नहीं हुई। यदि किसी पदाधिकारी, ट्रस्टी या जिम्मेदार अधिकारी की भूमिका सामने आती है तो उनके विरुद्ध कार्रवाई की संस्तुति भी की जा सकती है।

जांच दल यह भी पता लगाएगा कि कथित अनियमितता कब से चल रही थी और इसमें कितने लोग शामिल थे।

केंद्र स्तर पर भी बढ़ी सक्रियता

मामले के तूल पकड़ने के बाद केंद्र स्तर पर भी गतिविधियां तेज होने की चर्चा है। सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री कार्यालय से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने रविवार को अयोध्या पहुंचकर अपने स्तर पर जानकारी जुटाई। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

विनय कटियार अधिकारियों से मिले बिना लौटे

पूर्व सांसद और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता विनय कटियार ने शनिवार को अयोध्या पहुंचकर कहा था कि वह संबंधित अधिकारियों से मिलकर मामले में शिकायत देंगे और दोषियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग करेंगे। उन्होंने कहा था कि श्रद्धालुओं के चढ़ावे में गड़बड़ी करने वालों को जेल भेजा जाना चाहिए।

हालांकि रविवार को उनका अधिकारियों से मिलने का कार्यक्रम नहीं हो सका और वह बिना किसी औपचारिक शिकायत के लखनऊ लौट गए।

ट्रस्ट के भीतर भी बनी असहज स्थिति

सूत्रों के अनुसार मामले के सार्वजनिक होने के बाद ट्रस्ट के भीतर भी असहज स्थिति बनी हुई है। चर्चा है कि शीर्ष स्तर पर संवाद प्रभावित हुआ है और कई महत्वपूर्ण पदाधिकारी सार्वजनिक प्रतिक्रिया देने से बच रहे हैं।

इसी बीच ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के अस्वस्थ होने की जानकारी सामने आई है, जबकि ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा चिकित्सकीय परामर्श के लिए केरल गए हुए हैं।

अखिलेश यादव ने उठाए सवाल

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री Akhilesh Yadav ने विशेष जांच दल की जांच को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि साधु-संतों की जांच कराना सनातन परंपरा का अपमान है और सरकार को पूरे मामले पर स्पष्टता लानी चाहिए।

नृपेंद्र मिश्र ने जताया भरोसा

राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष Nripendra Misra ने विशेष जांच दल पर भरोसा जताया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई की है और जांच समिति में अनुभवी अधिकारियों को शामिल किया गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जांच निष्पक्ष और तथ्यों के आधार पर होगी।

जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें

राज्य सरकार ने विशेष जांच दल को सात दिन में प्रारंभिक तथा 15 दिन में अंतिम रिपोर्ट देने का दायित्व सौंपा है। ऐसे में अब सभी की निगाहें जांच दल की रिपोर्ट पर टिकी हैं। यह रिपोर्ट तय करेगी कि कथित गड़बड़ी केवल कुछ व्यक्तियों तक सीमित थी या इसकी जिम्मेदारी का दायरा कहीं अधिक व्यापक है।

मामले में अब सबसे बड़ा प्रश्न यही बना हुआ है कि यदि चढ़ावे में गड़बड़ी के संकेत मिले हैं तो अब तक प्राथमिकी दर्ज क्यों नहीं कराई गई। विशेष जांच दल की पड़ताल से इस प्रश्न का उत्तर मिलने की उम्मीद की जा रही है।

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