राम मंदिर के चढ़ावे पर घमासान: गबन के आरोपों से गरमाई सियासत, निष्पक्ष जांच की मांग तेज

अयोध्या, 12 जून 2026 (RNN)। अयोध्या स्थित राम मंदिर की दान राशि में कथित गबन और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों ने नया राजनीतिक और धार्मिक विवाद खड़ा कर दिया है। मामले को लेकर विपक्षी दलों ने भारतीय जनता पार्टी और मंदिर ट्रस्ट को निशाने पर लिया है, जबकि संत समाज के कई प्रमुख संतों ने भी पारदर्शी और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।

सूत्रों के अनुसार, राम मंदिर ट्रस्ट इस पूरे प्रकरण की गोपनीय जांच करा रहा है। जांच केवल कथित गबन तक सीमित नहीं है, बल्कि दान संग्रह से लेकर नकदी की गणना, अभिलेखीकरण और बैंक में जमा किए जाने की पूरी प्रक्रिया की तकनीकी समीक्षा भी की जा रही है। संबंधित तिथियों की सीसीटीवी फुटेज, दान पात्र खोलने की प्रक्रिया, नकदी गिनने वाले कर्मचारियों की भूमिका तथा डिजिटल रिकॉर्ड का मिलान किया जा रहा है।

बताया जा रहा है कि मंदिर में चढ़ावे की गणना बहुस्तरीय व्यवस्था के तहत होती है। ऐसे में जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कथित गड़बड़ी किसी प्रक्रिया संबंधी कमी का परिणाम है या फिर किसी व्यक्ति विशेष की भूमिका सामने आती है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कुछ कर्मचारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव और आंतरिक समीक्षा की भी चर्चा है, हालांकि ट्रस्ट की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने इस मुद्दे पर भाजपा सरकार को घेरते हुए कहा कि पहले राम मंदिर और अयोध्या में भूमि खरीद-फरोख्त को लेकर विवाद सामने आए थे और अब चढ़ावे में गड़बड़ी के आरोप लग रहे हैं। उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की।

वहीं, ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने भी मामले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राम मंदिर से जुड़े मामलों में पहले भी अनियमितताओं के आरोप सामने आते रहे हैं। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस विषय में सच्चाई सामने आनी चाहिए और निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।

राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे तथा बजरंग दल के संस्थापक विनय कटियार ने भी मामले की पारदर्शी जांच की मांग की है। उनका कहना है कि राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और चढ़ावे से जुड़े किसी भी विवाद का निष्पक्ष समाधान होना आवश्यक है।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और संत समाज की बढ़ती प्रतिक्रियाओं के बीच अब सभी की निगाहें ट्रस्ट की जांच और उसके निष्कर्षों पर टिकी हैं। श्रद्धालु भी चाहते हैं कि मामले की सच्चाई सामने आए और यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

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