भोपाल, 11 जून 2026 (यूएनएस)। मध्य प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिए गए हैं। नाम वापसी की समय-सीमा समाप्त होने के बाद तीन सीटों के लिए केवल तीन उम्मीदवार मैदान में बचे, जिसके चलते निर्वाचन की औपचारिक प्रक्रिया पूरी करते हुए रिटर्निंग अधिकारी ने सभी विजयी उम्मीदवारों को निर्वाचन प्रमाण पत्र सौंप दिया।
राज्यसभा चुनाव के लिए नाम वापसी की अंतिम तिथि 11 जून को दोपहर तीन बजे निर्धारित थी। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र निरस्त होने के बाद चुनावी मुकाबले की स्थिति समाप्त हो गई और भाजपा के तीनों उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो गए।
निर्वाचित उम्मीदवारों में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ, पार्टी नेता रजनीश अग्रवाल और महेश केवट शामिल हैं। प्रमाण पत्र प्राप्त करने के बाद तीनों नेताओं के सम्मान में भाजपा प्रदेश कार्यालय में स्वागत कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी की गई। विधायक दल की बैठक के बाद नव-निर्वाचित सांसद प्रदेश भाजपा कार्यालय पहुंचे, जहां प्रदेश नेतृत्व ने उनका अभिनंदन किया।
राज्यसभा चुनाव को लेकर विवाद कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पत्र खारिज होने के बाद शुरू हुआ। भाजपा ने उनके नामांकन पर आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया था कि उन्होंने अपने शपथ पत्र में हैदराबाद की एक अदालत में लंबित मामले की जानकारी नहीं दी। जांच के दौरान रिटर्निंग अधिकारी ने भाजपा की आपत्ति को सही मानते हुए उनका नामांकन निरस्त कर दिया।
कांग्रेस ने इस फैसले का विरोध करते हुए इसे राजनीतिक प्रेरित कार्रवाई बताया और इसके खिलाफ प्रदर्शन भी किया। मामला चुनाव आयोग तक पहुंचा, लेकिन आयोग ने भी रिटर्निंग अधिकारी के निर्णय को बरकरार रखा। आयोग का मानना था कि लंबित मामले की जानकारी शपथ पत्र में न देना नियमों का उल्लंघन है।
हालांकि कांग्रेस का कहना है कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। पार्टी के अनुसार उन्हें केवल न्यायालय से नोटिस प्राप्त हुआ था, इसलिए शपथ पत्र में उसका उल्लेख करना आवश्यक नहीं था। कांग्रेस ने निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता और न्याय की मांग करते हुए मामले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है। बताया जा रहा है कि मीनाक्षी नटराजन ने इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।
तीनों सीटों पर भाजपा उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचन के साथ ही मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया बिना मतदान के ही संपन्न हो गई।
