शंकराचार्यों का ऐसा अपमान मुगलों और अंग्रेजों ने भी नहीं किया, भाजपा दो विचारधाराओं में बंटी : स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

आगरा, 07 जून 2026 (यूएनएस)। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने रविवार को आगरा में कहा कि शंकराचार्यों का सम्मान सभी करते हैं, लेकिन एक व्यक्ति अहंकार में चूर होकर उनका अपमान कर रहा है। उन्होंने कहा कि शंकराचार्यों का ऐसा अपमान न तो मुगलों के समय हुआ और न ही अंग्रेजों के शासनकाल में। साथ ही उन्होंने दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी के भीतर भी दो अलग-अलग विचारधाराएं दिखाई दे रही हैं।

गो-संरक्षण और जनजागरण के उद्देश्य से निकाली जा रही गविष्टि यात्रा के तहत आगरा पहुंचे शंकराचार्य ने राजपुर चुंगी स्थित परशुराम मंदिर पार्क में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि भाजपा का एक वर्ग गाय को माता मानता है और संतों का सम्मान करता है, जबकि दूसरा वर्ग न तो गाय को माता कहने के लिए तैयार है और न ही संतों के सम्मान को महत्व देता है। उन्होंने कहा कि वे अच्छी सोच वाली भाजपा का समर्थन करते हैं, जबकि गलत नीतियों का विरोध करेंगे।

शंकराचार्य ने कहा कि उनकी यात्रा का उद्देश्य किसी सरकार को हटाकर दूसरी सरकार बनवाना नहीं है, बल्कि समाज को गौसंरक्षण के मुद्दे पर जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि आजादी के 78 वर्ष बाद भी गाय से जुड़े कई वादे पूरे नहीं हुए हैं और विभिन्न सरकारें इस विषय पर अपेक्षित कदम उठाने में असफल रही हैं।

उन्होंने कहा कि देश के सभी राजनीतिक दलों और नेताओं की एक परीक्षा होनी चाहिए। जो नेता और दल गाय को माता के रूप में स्वीकार करते हैं, उन्हें इसे सार्वजनिक रूप से घोषित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सत्ता में मौजूद दल सरकारी स्तर पर गाय को माता घोषित करें, जबकि विपक्षी दल अपनी पार्टी में प्रस्ताव पारित कर इसकी घोषणा करें।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि अब तक इस कसौटी पर केवल एकनाथ शिंदे खरे उतरे हैं, जिन्होंने सार्वजनिक रूप से गाय को माता कहा है। उनके अनुसार अभी तक किसी अन्य प्रमुख राजनीतिक दल या नेता ने इस दिशा में स्पष्ट पहल नहीं की है।

उन्होंने कहा कि हाल ही में उनकी यात्रा सैफई भी पहुंची थी, जहां उनका स्वागत किया गया और उन्होंने आशीर्वाद भी दिया। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत स्तर पर दिया गया आशीर्वाद और किसी राजनीतिक दल को समर्थन देना अलग-अलग बातें हैं। किसी भी दल को संगठनात्मक स्तर पर समर्थन तभी मिलेगा जब वह गाय को माता मानने संबंधी प्रस्ताव पारित करेगा।

शंकराचार्य ने कहा कि उनकी मुहिम का उद्देश्य राजनीतिक विवाद खड़ा करना नहीं, बल्कि गौसंरक्षण के पक्ष में स्पष्ट और सार्वजनिक प्रतिबद्धता सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि देश की जनता के सामने यह स्पष्ट होना चाहिए कि कौन-कौन से दल और नेता वास्तव में गाय की सेवा और संरक्षण के पक्ष में खड़े हैं।

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