संविदा बस चालक-परिचालकों का प्रदर्शन, मांगें न मानी गईं तो आत्महत्या की चेतावनी

लखनऊ में बुधवार को दुबग्गा डिपो के संविदा चालक और परिचालकों ने अपनी मांगों को लेकर हजरतगंज स्थित गांधी प्रतिमा पर जोरदार प्रदर्शन किया।

लखनऊ, 03 जून (यूएनएस)। राजधानी लखनऊ में बुधवार को दुबग्गा डिपो के संविदा चालक और परिचालकों ने अपनी मांगों को लेकर हजरतगंज स्थित गांधी प्रतिमा पर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए आरोप लगाया कि उनकी समस्याओं की लगातार अनदेखी की जा रही है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो वे आत्महत्या जैसा कदम उठाने को मजबूर होंगे।

प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का कहना है कि वे पिछले कई दिनों से दुबग्गा डिपो में कार्य बहिष्कार कर विरोध दर्ज करा रहे थे, लेकिन संबंधित अधिकारियों द्वारा उनकी मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। इसके बाद उन्होंने अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाने के लिए गांधी प्रतिमा पर प्रदर्शन करने का फैसला किया।

प्रदर्शन की सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर ईको गार्डन भेज दिया। इसके बावजूद कर्मचारियों ने अपनी मांगों पर अड़े रहने की बात कही।

प्रदर्शनकारी सुनील ने बताया कि दुबग्गा डिपो के संविदा कर्मचारियों का निजी कंपनी एसएस एंटरप्राइजेज में समायोजन किया जा रहा है, जिसका वे विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि कोई भी चालक या परिचालक निजी कंपनी के अधीन काम नहीं करना चाहता। उन्होंने बताया कि शहर की सिटी बस सेवा में कार्यरत 300 से अधिक परिचालक कई दिनों से हड़ताल पर हैं, जिसके चलते शहर के 22 प्रमुख मार्गों पर बस संचालन प्रभावित हुआ है।

एक अन्य प्रदर्शनकारी महेंद्र ने कहा कि संविदा कर्मचारियों को पहले से ही कम वेतन और सीमित सुविधाओं में काम करना पड़ रहा है। ऐसे में निजी कंपनी के अधीन भेजे जाने से उनके शोषण की आशंका और बढ़ जाएगी। उन्होंने कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा।

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि उनकी समस्याओं को सुनने के बजाय प्रशासन दमनात्मक कार्रवाई कर रहा है। उनका कहना है कि कुछ कर्मचारी मुख्यमंत्री आवास के बाहर आत्मदाह का प्रयास करने पहुंचे थे, जिन्हें हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया। कर्मचारियों ने मांग की कि उनके साथियों को तत्काल रिहा किया जाए और उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लिए जाएं।

संविदा चालक-परिचालकों ने कहा कि उनकी नियुक्ति संविदा आधार पर परिवहन व्यवस्था में सेवा देने के लिए हुई थी, ऐसे में उन्हें किसी निजी कंपनी के अधीन भेजना अनुचित है। उन्होंने सरकार से हस्तक्षेप कर समायोजन की प्रक्रिया रोकने और उनकी सेवाएं पूर्ववत जारी रखने की मांग की है।

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