प्रजातंत्र में विपक्ष को पूरी ताकत से अपना दायित्व निभाना चाहिए: सुमित्रा महाजन

इंदौर (मध्यप्रदेश), 16 जनवरी – लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की वरिष्ठ नेता सुमित्रा महाजन ने शुक्रवार को कहा कि प्रजातंत्र में विपक्ष को उसका काम पूरी ताकत से करना चाहिए। उन्होंने यह टिप्पणी लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के शनिवार को प्रस्तावित इंदौर दौरे के संदर्भ में की।

राहुल गांधी अपने इंदौर दौरे के दौरान शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल के कारण उल्टी-दस्त के प्रकोप से जूझ रहे मरीजों और इस बीमारी से जान गंवाने वाले लोगों के शोकसंतप्त परिजनों से मुलाकात करेंगे। गांधी के दौरे पर प्रतिक्रिया देते हुए महाजन ने कहा, “उन्हें आने दीजिए। अगर वह कुछ अच्छे सुझाव देते हैं, तो संबंधित लोगों को उन पर विचार करना चाहिए।”

महाजन ने कहा कि भाजपा भी एक समय विपक्ष में रही है और उसने पूरी ताकत से जनता की लड़ाई लड़ते हुए लोगों का विश्वास जीता। उन्होंने विपक्ष की भूमिका को लोकतंत्र का अहम स्तंभ बताते हुए कहा कि रचनात्मक आलोचना और सुझाव व्यवस्था को मजबूत बनाते हैं।

राहुल गांधी के इंदौर आगमन से एक दिन पहले सुमित्रा महाजन ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी से अपने निवास पर मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने भागीरथपुरा इलाके में उल्टी-दस्त के प्रकोप और दूषित पेयजल की समस्या पर चर्चा की। महाजन ने बताया कि पटवारी ने कहा कि इस समस्या का समाधान सभी को मिलकर करना चाहिए। उन्होंने कहा, “मेरी भी यही राय है कि दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इस समस्या को सुलझाने पर विचार होना चाहिए और इसके लिए तकनीकी विशेषज्ञों से भी सुझाव लिए जाने चाहिए।”

लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष ने ‘विकसित भारत–जी राम जी अधिनियम 2025’ को लेकर कांग्रेस के विरोध को भी बेमानी बताया। उन्होंने कहा, “इस कानून को संक्षेप में जी राम जी कहा जा रहा है। जब हम ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना संचालित करेंगे, तो सब लोग भगवान राम को याद करेंगे। यह एक अच्छी बात है।”

वाराणसी के मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास कार्य के दौरान इंदौर की पूर्व होलकर शासक देवी अहिल्याबाई की प्रतिमाओं को कथित रूप से क्षतिग्रस्त किए जाने के मुद्दे पर महाजन ने सधी हुई प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि कौन-सी मूर्तियां टूटी हैं, लेकिन सरकार के लिए यह जरूरी है कि वह विकास कार्यों के साथ-साथ ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण भी सुनिश्चित करे। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में वाराणसी प्रशासन पहले ही स्थिति स्पष्ट कर चुका है और उसका कहना है कि मणिकर्णिका घाट पर जनता की सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं।

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