शाहजहांपुर। जनपद में धान खरीद व्यवस्था में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोप सामने आने के बाद शासन ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया है। यह कार्रवाई भारतीय जनता पार्टी के सांसद अरुण सागर द्वारा जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी के खिलाफ की गई शिकायत के बाद की गई है।
सांसद अरुण सागर ने शासन को भेजे गए अपने शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि आरएफसी सहित अन्य सरकारी धान क्रय केंद्रों पर किसानों से धान तुलवाने के नाम पर प्रति क्विंटल 200 से 300 रुपये तक की अवैध वसूली की जा रही है। आरोप है कि रिश्वत न देने पर किसानों के धान को नमी युक्त या गंदा बताकर वापस कर दिया जाता है, जिससे किसान मजबूरन बिचौलियों के सहारे धान बेचने को विवश हो रहे हैं।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि अधिकांश धान खरीद संबद्ध राइस मिलों के माध्यम से कराई जा रही है। एक ही राइस मिल को कई-कई क्रय केंद्रों से जोड़ दिया गया है, जबकि कई केंद्रों पर वास्तविक रूप से धान खरीद की प्रक्रिया चल ही नहीं रही है। इसके बावजूद धान की साफ-सफाई, परिवहन और क्रय केंद्र से राइस मिल तक पहुंचाने के नाम पर फर्जी अभिलेखों के आधार पर भुगतान कराया जा रहा है। सांसद ने इसे एक सुनियोजित घोटाला करार दिया है।
अरुण सागर ने बताया कि उन्होंने 7 जनवरी को जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी राकेश मोहन पांडेय के खिलाफ शासन में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप है कि अधिकारी अपने अधीनस्थ कर्मचारियों के माध्यम से किसानों को निर्धारित सरकारी क्रय केंद्रों पर धान बेचने से रोक रहे हैं, जिससे किसानों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
मामले को लेकर अपर जिलाधिकारी ने कहा कि उनके संज्ञान में फिलहाल ऐसी कोई शिकायत नहीं है। वहीं, जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी राकेश मोहन पांडेय से संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन उनका मोबाइल फोन बंद मिला।
शासन द्वारा गठित तीन सदस्यीय जांच कमेटी अब पूरे मामले की जांच कर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। फिलहाल किसानों और प्रशासनिक हलकों की निगाहें जांच कमेटी की रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं।
