नयी दिल्ली, 2 अप्रैल (UNS)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के विरोध में सात न्यायिक अधिकारियों का कई घंटे तक घेराव किए जाने की घटना को बृहस्पतिवार को देश के इतिहास में “काला धब्बा” करार दिया।
भाजपा ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इशारे पर मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया में बाधा डालने और रोहिंग्याओं की रक्षा करने के उद्देश्य से इस घटना को अंजाम दिया।
यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब उच्चतम न्यायालय ने इस घटना को “निंदनीय” और शासन की “पूर्ण विफलता” का सूचक करार देते हुए पश्चिम बंगाल प्रशासन को उसकी कथित निष्क्रियता के लिए कड़ी फटकार लगाई है।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने पार्टी मुख्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में सवाल किया कि क्या शीर्ष अदालत की टिप्पणियों के बाद ममता बनर्जी “शर्मिंदा” हैं और क्या वह मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगी।
उन्होंने कहा, “यह ममता बनर्जी का ‘जंगल राज’ है। टीएमसी कार्यकर्ताओं ने न्यायिक अधिकारियों को बंधक बना लिया। भारत के इतिहास में ऐसी घटना पहले कभी नहीं हुई। यह दुर्भाग्यपूर्ण और एक काला धब्बा है।”
भाटिया ने कहा कि सातों न्यायिक अधिकारी उच्चतम न्यायालय के निर्देश का पालन करते हुए अपना कार्य कर रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी न्यायिक अधिकारियों को डराने और एसआईआर प्रक्रिया में बाधा डालने की कोशिश कर रही हैं।
घटना के संबंध में बताया गया कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के विरोध में प्रदर्शनकारियों ने बुधवार को मालदा जिले में एसआईआर कवायद में शामिल सात न्यायिक अधिकारियों का कई घंटे तक घेराव किया। बाद में देर रात सुरक्षा बलों ने बल प्रयोग कर भीड़ को हटाया और अधिकारियों को सुरक्षित निकाला।
प्रदर्शनकारियों ने इस दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग-12 (कोलकाता–सिलीगुड़ी) को भी अवरुद्ध कर दिया था।
भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी रोहिंग्याओं की रक्षा के लिए अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को न्यायिक अधिकारियों को “बंधक” बनाने के लिए भेज रही हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक है और राज्य की जनता तृणमूल कांग्रेस को सत्ता से हटाने का मन बना चुकी है।
पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों के चुनाव के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को दो चरणों में मतदान होगा, जबकि मतों की गिनती चार मई को की जाएगी।
