यूजीसी विवाद के बीच निलंबन पर अलंकार अग्निहोत्री का बयान: इस्तीफा दे चुका हूं

अलंकार अग्निहोत्री

बरेली (उप्र), 27 जनवरी  बरेली के नगर मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा निलंबन की कार्रवाई पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि वह एक दिन पहले ही सेवा से इस्तीफा दे चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ साजिश रची गई और सोमवार रात जिलाधिकारी कार्यालय में हुई एक घटना के दौरान उनके बारे में अपमानजनक टिप्पणी सुनी गई।

प्रांतीय प्रशासनिक सेवा (पीसीएस) के 2019 बैच के अधिकारी अग्निहोत्री ने सरकारी नीतियों—विशेषकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े मामले—पर नाराजगी जताते हुए सोमवार को राज्यपाल और बरेली के जिलाधिकारी अविनाश सिंह को ईमेल के माध्यम से इस्तीफा भेजा था। उनका कहना है कि यूजीसी के नए नियम जाति-आधारित असंतोष को भड़का सकते हैं।

मंगलवार सुबह अपने आधिकारिक आवास पर पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा, “मैं पहले ही इस्तीफा दे चुका हूं। उसके बाद निलंबन या किसी अन्य कार्रवाई पर मेरी कोई टिप्पणी नहीं है।”

हालांकि, उन्होंने दावा किया कि सोमवार रात जिलाधिकारी कार्यालय में स्पीकर मोड पर हुई एक फोन बातचीत उन्होंने सुनी, जिसमें कथित तौर पर कहा गया, “पंडित पागल हो गए हैं, उन्हें पूरी रात बैठाए रखें।” अग्निहोत्री के अनुसार, इस कथित टिप्पणी के प्रसार के बाद विभिन्न जिलों से उन्हें फोन आए और सामाजिक संगठनों ने आपत्ति जताई।

उन्होंने कहा कि उन्हें जिलाधिकारी कार्यालय बुलाया गया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि फोन किसने किया और टिप्पणी किसने की। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि निलंबन आदेश में लगाए गए अनुशासनहीनता के आरोपों और जांच के दौरान शामली जिलाधिकारी कार्यालय से संबद्ध किए जाने के निर्देशों का उनके लिए कोई अर्थ नहीं है, क्योंकि वह पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं।

अग्निहोत्री ने आरोप लगाया कि उनसे इस्तीफा टालने या लिखित आवेदन देकर छुट्टी पर जाने का आग्रह किया गया ताकि पहले निलंबन कर “मामले का स्वरूप बदला” जा सके। उन्होंने दावा किया कि ऐसा न हो पाने पर देर रात निलंबन आदेश जारी किया गया।

उन्होंने व्यवस्था के भीतर “ब्राह्मण-विरोधी पूर्वाग्रह” की धारणा का भी उल्लेख किया और कहा कि यह टैग सरकार से जुड़ गया है। आगे की कार्रवाई को लेकर उन्होंने कहा कि वह जिलाधिकारी कार्यालय जाकर अपना पक्ष रखेंगे और मीडिया के माध्यम से भी यह स्पष्ट करने का प्रयास करेंगे कि कथित टिप्पणी किसने की।

अग्निहोत्री ने बताया कि उन्होंने लगभग अपना सरकारी आवास खाली कर दिया है। सोमवार को उन्होंने यूजीसी के नए नियमों को “काला कानून” बताते हुए आरोप लगाया था कि ये कॉलेजों के शैक्षणिक वातावरण को दूषित कर रहे हैं और इन्हें तत्काल वापस लिया जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि इस्तीफे के बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से फोन पर बातचीत हुई, जिसमें उन्हें आशीर्वाद मिला। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए संदेश के सवाल पर उन्होंने कहा कि उनका किसी के प्रति व्यक्तिगत विरोध नहीं है, लेकिन राज्य में “ब्राह्मण विरोध की एक विशेष विचारधारा” व्याप्त है।

अग्निहोत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से इस पूरे मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने की अपील भी की। उन्होंने कहा, “अगर किसी जिला मजिस्ट्रेट के बारे में इस तरह की टिप्पणी की जा रही है, तो सबसे पहले उस व्यक्ति की पहचान उजागर होनी चाहिए, जिसने ‘पंडित पागल हो गए हैं’ कहा।”

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