लखनऊ, 14 जुलाई। बांदा जिले में चल रही चकबंदी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर किसानों का आंदोलन मंगलवार को राजधानी लखनऊ पहुंच गया। बड़ी संख्या में किसानों ने चकबंदी आयुक्त कार्यालय का घेराव कर प्रदर्शन किया और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।
प्रदर्शन के बाद जनता दल यूनाइटेड (जदयू) की प्रदेश उपाध्यक्ष शालिनी सिंह पटेल के नेतृत्व में किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने चकबंदी आयुक्त को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बांदा जिले में चल रही चकबंदी प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच कराने और दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की गई।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि चकबंदी के दौरान नियमों की अनदेखी की गई, राजस्व अभिलेखों में हेराफेरी की गई तथा भ्रष्टाचार के कारण किसानों का लगातार उत्पीड़न हो रहा है। उनका कहना है कि इन कथित अनियमितताओं से किसानों को आर्थिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि अमलीकोर, सिलेहटा, बहिंगा, खटीटाखुर्द और महबरा गांवों में चकबंदी प्रक्रिया के दौरान गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। किसानों का कहना है कि मंडलायुक्त और चकबंदी निदेशालय स्तर पर गठित जांच समितियों की रिपोर्ट अब तक पूरी नहीं हुई है। ऐसे में मामले की निष्पक्ष जांच राजस्व परिषद की स्वतंत्र टीम से कराई जानी चाहिए।
किसानों ने आरोप लगाया कि ग्राम अमलीकोर में चक सीमांकन का लगभग 40 प्रतिशत कार्य ही पूरा हुआ था, लेकिन शासन को कार्य पूर्ण होने की रिपोर्ट भेज दी गई। उनका कहना है कि अधूरे सीमांकन के आधार पर कब्जा परिवर्तन सहित अन्य प्रशासनिक कार्रवाई कर दी गई, जिससे अनेक किसानों को नुकसान उठाना पड़ा।
ज्ञापन में चकबंदी विभाग के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों पर नियमों के विपरीत आदेश पारित करने, फर्जी अभिलेख तैयार करने, रिश्वत लेने, नामांतरण में अनियमितता करने तथा शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं करने के आरोप भी लगाए गए हैं। किसानों का यह भी कहना है कि पहले हुई जांचों की रिपोर्टों पर भी अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है।
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि इन मांगों को लेकर किसान 16 जून से बांदा कलेक्ट्रेट परिसर में धरना दे रहे थे, जो बाद में आमरण अनशन में बदल गया। न्याय की मांग पूरी न होने पर अब आंदोलन का दायरा बढ़ाते हुए 14 जुलाई से लखनऊ स्थित चकबंदी आयुक्त मुख्यालय पर धरना शुरू किया गया है।
किसानों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित नहीं की गई, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। वहीं, चकबंदी विभाग की ओर से इस मामले में तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
