69000 शिक्षक भर्ती: आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों का बेसिक शिक्षा निदेशालय पर धरना, सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप

69000 शिक्षक भर्ती: आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों का बेसिक शिक्षा निदेशालय पर धरना, सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप

लखनऊ, 14 जुलाई। उत्तर प्रदेश की 69000 सहायक शिक्षक भर्ती में आरक्षण नियमों के पालन की मांग को लेकर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने मंगलवार को राजधानी लखनऊ स्थित बेसिक शिक्षा निदेशालय, निशातगंज के बाहर धरना-प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में पहुंचे अभ्यर्थियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट में दिए गए आश्वासन के बावजूद सरकार ने अब तक संशोधित चयन सूची (री-विजिट लिस्ट) जारी नहीं की है।

धरने पर बैठे अभ्यर्थियों का कहना था कि सरकार ने 19 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान 13 अगस्त 2024 के इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के आदेश के अनुरूप चयन सूची का पुनरीक्षण करने के लिए छह सप्ताह का समय मांगा था। उनका आरोप है कि अदालत द्वारा दिया गया समय पूरा हो चुका है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की गई।

अभ्यर्थियों ने कहा कि मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में होनी है और वे नहीं चाहते कि सरकार इस मामले में किसी प्रकार की देरी या टालमटोल करे। उनका कहना है कि सरकार को न्यायालय में दिए गए अपने आश्वासन का पालन करते हुए जल्द से जल्द संशोधित चयन सूची जारी करनी चाहिए।

प्रदर्शन में शामिल अभ्यर्थी विक्रम और अमित मौर्य ने आरोप लगाया कि 69000 शिक्षक भर्ती में आरक्षण नियमों की अनदेखी के कारण आरक्षित वर्ग के हजारों अभ्यर्थी चयन से वंचित रह गए। उन्होंने कहा कि पिछले लगभग छह वर्षों से आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी न्याय और आरक्षण नियमों के सही अनुपालन की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 13 अगस्त 2024 को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने आरक्षण नियमों के अनुरूप नई चयन सूची तैयार कर पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने का आदेश दिया था। इसके बावजूद आज तक आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को न्याय नहीं मिल सका है।

धरने में शामिल धनंजय गुप्ता ने आरोप लगाया कि सरकार दलित और पिछड़े वर्ग के अभ्यर्थियों को न्याय देने में हीलाहवाली कर रही है। उन्होंने कहा कि मजबूर होकर अभ्यर्थियों को एक बार फिर सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करना पड़ रहा है।

प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार शीघ्र ही हाईकोर्ट के आदेश और सुप्रीम कोर्ट में दिए गए आश्वासन के अनुरूप कार्रवाई नहीं करती है, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। फिलहाल सभी की निगाहें 21 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस बहुचर्चित भर्ती मामले में आगे की दिशा तय हो सकती है।

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