‘लखनऊ अब सिर्फ तहज़ीब नहीं, ब्रह्मोस मिसाइल का भी शहर’, केजीएमयू दीक्षांत समारोह में बोले डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक

लखनऊ, 13 जुलाई 2026। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने सोमवार को किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के 22वें दीक्षांत समारोह में लखनऊ की बदलती पहचान का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले कहा जाता था, “मुस्कुराइए, आप लखनऊ में हैं”, लेकिन अब यह शहर रक्षा उत्पादन का भी महत्वपूर्ण केंद्र बन रहा है।

उन्होंने कहा कि रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के प्रयासों से लखनऊ में ब्रह्मोस मिसाइल का निर्माण हो रहा है। उन्होंने कहा कि यदि कोई पड़ोसी देश भारत के खिलाफ दुस्साहस करेगा तो उसे इसका करारा जवाब मिलेगा। ब्रह्मोस मिसाइल की सटीक मारक क्षमता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से आतंकवादियों को उनके ठिकानों पर भी निशाना बनाया जा सकता है।

केजीएमयू के 22वें दीक्षांत समारोह का आयोजन

अटल बिहारी वाजपेयी कन्वेंशन सेंटर में आयोजित समारोह में राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने मेधावी छात्रों को 54 स्वर्ण पदक प्रदान किए तथा 1,701 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान कीं। इनमें 975 छात्र और 726 छात्राएं शामिल रहीं। समारोह के मुख्य अतिथि रक्षामंत्री राजनाथ सिंह थे।

इस अवसर पर स्वास्थ्य राज्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह ने कहा कि किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के नाम को लेकर कई लोगों को भ्रम होता है कि इसका निर्माण किंग जॉर्ज ने कराया होगा, जबकि वास्तविकता यह है कि इसके निर्माण में उनका कोई आर्थिक योगदान नहीं था।

समारोह में M. Srinivas, सदस्य, नीति आयोग को चिकित्सा प्रशासन और स्वास्थ्य नीति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए मानद विज्ञान वाचस्पति (डी.एससी.) की उपाधि से सम्मानित किया गया।

‘डॉक्टर का व्यवहार भी इलाज का हिस्सा’

समारोह को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि केजीएमयू देश का प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान है और यहां से निकलने वाले छात्र केवल डिग्री ही नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और उत्कृष्ट चिकित्सा परंपरा को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी भी अपने साथ लेकर जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि डॉक्टर का दायित्व केवल बीमारी का उपचार करना नहीं, बल्कि मरीज की सच्चे मन से परवाह करना भी है। मरीज डॉक्टर को उसकी सहानुभूति, संवेदनशीलता और भरोसा देने की क्षमता के लिए याद रखता है। इसलिए प्रत्येक चिकित्सक के व्यवहार में करुणा और मानवीय संवेदनाएं होनी चाहिए।

वक्ताओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि चिकित्सा का सबसे बड़ा धर्म बिना किसी भेदभाव के हर व्यक्ति की सेवा करना है। गरीब, दूरदराज और कमजोर वर्गों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना ही एक सच्चे डॉक्टर की पहचान है।

नई तकनीक अपनाएं, लेकिन मानवीय मूल्य न छोड़ें

समारोह में कहा गया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), रोबोटिक सर्जरी, जीन थेरेपी और डिजिटल हेल्थ जैसी आधुनिक तकनीकें चिकित्सा का भविष्य बदल रही हैं, लेकिन कोई भी तकनीक डॉक्टर की संवेदनशीलता, करुणा और मानवीय व्यवहार का विकल्प नहीं बन सकती। नव चिकित्सकों से आधुनिक ज्ञान और मानवीय मूल्यों के संतुलन के साथ चिकित्सा सेवा देने का आह्वान किया गया।

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