लखनऊ, 13 जुलाई 2026। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के दीक्षांत समारोह में नव चिकित्सकों को संबोधित करते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) चिकित्सा क्षेत्र में नई संभावनाएं लेकर आए हैं, लेकिन मरीज के मन का दर्द समझने और उसे भावनात्मक संबल देने का कार्य केवल एक संवेदनशील डॉक्टर ही कर सकता है।
उन्होंने कहा कि मशीनें इलाज में सहयोग कर सकती हैं, लेकिन डॉक्टर की करुणा, संवेदना और मानवीय स्पर्श ही जीवन बचाने की सबसे बड़ी ताकत है। नव चिकित्सकों से उन्होंने कहा कि वे केवल एक पेशे में नहीं, बल्कि मानव सेवा के सबसे पवित्र दायित्व में प्रवेश कर रहे हैं।
‘सफेद कोट सेवा और जिम्मेदारी का प्रतीक’
रक्षामंत्री ने कहा कि डॉक्टर का सफेद कोट केवल एक पहचान नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और जिम्मेदारी का प्रतीक है। उन्होंने युवा चिकित्सकों से अपने पेशे के प्रति लिए गए संकल्प को जीवनभर निभाने का आह्वान करते हुए कहा कि यही उनकी सबसे बड़ी पूंजी होगी।
गरीब मरीज के लिए डॉक्टर ही सबसे बड़ी उम्मीद
राजनाथ सिंह ने अमेरिका के प्रसिद्ध चिकित्सक Paul Farmer का उल्लेख करते हुए कहा कि गरीब और जरूरतमंद मरीजों की सेवा ही चिकित्सा का सर्वोच्च धर्म है। उन्होंने कहा कि संपन्न व्यक्ति के पास इलाज के कई विकल्प हो सकते हैं, लेकिन गरीब मरीज डॉक्टर के पास केवल उम्मीद लेकर आता है। इसलिए हर मरीज का बिना किसी भेदभाव के समान भाव से उपचार होना चाहिए।
रामचरितमानस के प्रसंग से दिया मानवीय सेवा का संदेश
उन्होंने रामचरितमानस का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि युद्ध में लक्ष्मण के घायल होने पर लंका के राजवैद्य सुषेण ने यह नहीं देखा कि मरीज किस पक्ष का है। उन्होंने केवल एक जीवन बचाने को अपना धर्म माना। यही चिकित्सा का वास्तविक दर्शन है और यही प्रत्येक डॉक्टर की पहचान होनी चाहिए।
‘मरीज की बात ध्यान से सुनना भी इलाज का हिस्सा’
रक्षामंत्री ने प्रसिद्ध चिकित्सक William Osler का उल्लेख करते हुए कहा कि कई बार बीमारी का सही सुराग मरीज की बातों में ही छिपा होता है। इसलिए डॉक्टरों को जल्दबाजी के बजाय धैर्य और संवेदनशीलता के साथ मरीज की पूरी बात सुननी चाहिए।
डॉक्टर अपने स्वास्थ्य का भी रखें ध्यान
उन्होंने चिकित्सकों को योग और ध्यान को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने की सलाह देते हुए कहा कि चिकित्सा सेवा में दिन-रात कार्य करना पड़ता है, इसलिए स्वयं का स्वास्थ्य भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
तकनीक जरूरी, लेकिन मानवीय स्पर्श का विकल्प नहीं
राजनाथ सिंह ने कहा कि एआई, जीन एडिटिंग, सिंथेटिक बायोलॉजी और प्रिसिजन मेडिसिन जैसी आधुनिक तकनीकों ने चिकित्सा विज्ञान की दिशा बदल दी है। इसके बावजूद कोई मशीन किसी मां को यह भरोसा नहीं दिला सकती कि उसका बच्चा अवश्य स्वस्थ होगा और न ही किसी बुजुर्ग का हाथ पकड़कर उसे भावनात्मक सहारा दे सकती है। यह कार्य केवल एक संवेदनशील डॉक्टर ही कर सकता है।
सीखने की कोई उम्र नहीं होती
उन्होंने केजीएमयू की पहली महिला कुलपति Saroj Yadav Gaur का उदाहरण देते हुए कहा कि 79 वर्ष की आयु में पीएचडी में प्रवेश लेकर उन्होंने सिद्ध किया कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती। उन्होंने नव चिकित्सकों से नई तकनीकों को अपनाने, निरंतर सीखते रहने और जिज्ञासु बने रहने का आग्रह किया।
ज्ञान, सेवा और संवेदना से चिकित्सा को नई ऊंचाइयों तक ले जाएं
अपने संबोधन के समापन में रक्षामंत्री ने कहा कि चिकित्सा विज्ञान की हर बड़ी खोज किसी ऐसे व्यक्ति ने की, जिसने स्थापित मान्यताओं पर प्रश्न उठाने का साहस किया। उन्होंने नव चिकित्सकों से ज्ञान, सेवा, संवेदना और मानवता के मूल्यों को अपने जीवन का आधार बनाकर चिकित्सा क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का आह्वान किया।
