लखनऊ, 18 जून 2026 (यूएनएस)। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा और दानराशि को लेकर उठे विवाद तथा चल रही एसआईटी जांच के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को अयोध्या दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वह रामलला के दर्शन-पूजन के साथ विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। विवाद सामने आने के बाद यह उनका पहला अयोध्या दौरा है, इसलिए राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से इसे बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री के आगमन से पहले जिला प्रशासन ने सुरक्षा और प्रोटोकॉल से जुड़े विस्तृत निर्देश जारी किए हैं। जारी दिशा-निर्देशों में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से अनुरोध किया गया है कि मुख्यमंत्री के मंदिर दर्शन कार्यक्रम के दौरान व्यवस्था संभालने के लिए वह किसी अन्य प्रतिनिधि को नामित करें। प्रशासन की ओर से इस संबंध में ड्यूटी मजिस्ट्रेट को प्रतिनिधि का नाम उपलब्ध कराने को भी कहा गया है।
सूत्रों के अनुसार, यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब राम मंदिर की दानराशि और चढ़ावे में कथित गड़बड़ियों को लेकर विशेष जांच दल (एसआईटी) लगातार जांच कर रहा है। हालांकि प्रशासन या ट्रस्ट की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है, लेकिन इस निर्देश को लेकर राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
उधर, एसआईटी की जांच लगातार चौथे दिन भी जारी रही। गुरुवार सुबह जांच टीम एक बार फिर राम मंदिर परिसर पहुंची और मंदिर ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्र से करीब चार घंटे तक पूछताछ की। सूत्रों के मुताबिक पूछताछ का केंद्र चढ़ावा राशि की गणना प्रक्रिया, कर्मचारियों की नियुक्ति और वित्तीय निगरानी से जुड़े मुद्दे रहे। जांच एजेंसी अब तक कई कर्मचारियों, बैंक कर्मियों और ट्रस्ट से जुड़े लोगों से पूछताछ कर चुकी है।
इस बीच विपक्ष ने भी मामले को लेकर सरकार और ट्रस्ट पर दबाव बढ़ा दिया है। अयोध्या पहुंचे कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने ट्रस्ट पदाधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए चंपत राय और गोपाल राव की गिरफ्तारी की मांग की। उन्होंने कहा कि भगवान राम के नाम पर आए चढ़ावे में गड़बड़ी के आरोप बेहद गंभीर हैं और पूरे मामले की उच्च न्यायालय के किसी वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में जांच कराई जानी चाहिए।
राम मंदिर चढ़ावा विवाद, एसआईटी जांच और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अयोध्या दौरे को देखते हुए प्रदेश की राजनीतिक गतिविधियां अयोध्या पर केंद्रित हो गई हैं। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि मुख्यमंत्री अपने दौरे के दौरान इस पूरे विवाद पर कोई संकेत या टिप्पणी करते हैं या नहीं।
