राम मंदिर ट्रस्ट से चंदे और खर्च का हिसाब मांगते हुए राजद सांसद सुधाकर सिंह ने भेजा कानूनी नोटिस

नई दिल्ली, 18 जून। अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की वित्तीय पारदर्शिता को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। बिहार के बक्सर से राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद सुधाकर सिंह की ओर से सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत ने गुरुवार को ट्रस्ट के पदाधिकारियों को कानूनी नोटिस भेजकर वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक प्राप्त चंदे और उसके उपयोग का पूरा विवरण सार्वजनिक करने की मांग की है।

नोटिस ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास, महासचिव चंपत राय तथा कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि को भेजा गया है। इसमें कहा गया है कि नोटिस प्राप्त होने के तीन दिनों के भीतर ट्रस्ट अपने लेखा-जोखा का पूरा और मदवार विवरण सार्वजनिक करे। इसमें लेखा परीक्षित बैलेंस शीट, आय-व्यय का विवरण, लेखा परीक्षक की रिपोर्ट, ट्रस्ट द्वारा खरीदी गई भूमि का विवरण, बैंक खातों की जानकारी तथा विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम के तहत प्राप्त विदेशी चंदे का ब्यौरा भी शामिल हो।

अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत ने कहा कि यह नोटिस पूरी तरह जनहित में जारी किया गया है और इसका कोई राजनीतिक, व्यक्तिगत या पक्षपातपूर्ण उद्देश्य नहीं है। उन्होंने कहा कि जब किसी धार्मिक ट्रस्ट के पास देश और विदेश के लाखों श्रद्धालुओं द्वारा दिया गया सार्वजनिक धन हो, तब उसके उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक हो जाता है।

राजद सांसद सुधाकर सिंह ने कहा कि उनकी चिंता केवल यह सुनिश्चित करने की है कि श्रद्धालुओं द्वारा आस्था और विश्वास के साथ दिए गए धन का उपयोग पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ किया जाए। उन्होंने कहा कि भूमि खरीद, वित्तीय लेन-देन और खर्चों को लेकर समय-समय पर विभिन्न प्रकार की खबरें और आशंकाएं सामने आती रही हैं। ऐसे में ट्रस्ट को स्वयं आगे आकर सभी वित्तीय जानकारियां सार्वजनिक करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि आयकर अधिनियम की धारा 80जी के तहत पंजीकृत और सार्वजनिक चंदा प्राप्त करने वाले किसी भी ट्रस्ट का यह दायित्व है कि वह जनता के सामने स्पष्ट और सत्यापित लेखा-जोखा प्रस्तुत करे। उन्होंने उम्मीद जताई कि ट्रस्ट इस नोटिस को टकराव के रूप में नहीं बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में एक सकारात्मक पहल के रूप में देखेगा।

कानूनी नोटिस में भारतीय न्यास अधिनियम 1882, आयकर अधिनियम 1961, धनशोधन निवारण अधिनियम 2002 तथा सार्वजनिक धार्मिक ट्रस्टों से संबंधित विभिन्न कानूनी प्रावधानों का उल्लेख किया गया है। नोटिस में कहा गया है कि सार्वजनिक दान प्राप्त करने वाले ट्रस्टों पर सही लेखांकन बनाए रखने और आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी होती है।

नोटिस में मद्रास उच्च न्यायालय के एक हालिया निर्णय का भी हवाला दिया गया है, जिसमें कहा गया था कि सार्वजनिक धार्मिक संस्थाओं को दिया गया दान किसी ट्रस्टी की निजी संपत्ति नहीं होता, बल्कि वह समुदाय की संपत्ति माना जाता है। इसलिए समुदाय को उसके उपयोग और लेखा-जोखा के बारे में जानकारी मांगने का पूरा अधिकार है।

नोटिस में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर संतोषजनक उत्तर नहीं दिया जाता है, तो मामले को उचित कानूनी मंचों पर ले जाया जाएगा। इस घटनाक्रम के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर बहस और तेज होने की संभावना है।

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