उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप: पूर्व मंत्री मोहसिन रज़ा ने BCCI फंड के दुरुपयोग का लगाया आरोप

लखनऊ, 18 जून 2026। उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (यूपीसीए) में कथित वित्तीय अनियमितताओं और क्रिकेट विकास के लिए मिले फंड के दुरुपयोग को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। पूर्व राज्यमंत्री एवं पूर्व रणजी क्रिकेटर मोहसिन रज़ा ने एसोसिएशन के पदाधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए पूरे मामले की जवाबदेही तय करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के युवा क्रिकेटरों के भविष्य से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

“सेव उत्तर प्रदेश क्रिकेट कैंपेन” के तहत जारी एक वीडियो संदेश में मोहसिन रज़ा ने कहा कि यूपीसीए के पदाधिकारी क्रिकेट विकास के नाम पर प्राप्त संसाधनों का सही उपयोग करने में विफल रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एसोसिएशन के पास सैकड़ों करोड़ रुपये की उपलब्ध राशि होने के बावजूद वित्तीय निर्णयों को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं, जिनका जवाब दिया जाना चाहिए।

बीसीसीआई फंड के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं के लगाए आरोप, जवाबदेही की मांग तेज

मोहसिन रज़ा के अनुसार, एसोसिएशन के पास लगभग 400 करोड़ रुपये से अधिक की उपलब्ध राशि और करीब 105 करोड़ रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट होने के बावजूद दिसंबर 2025 में 75 करोड़ रुपये का ऋण लिया गया। उन्होंने इस ऋण प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब पर्याप्त धनराशि पहले से उपलब्ध थी तो अतिरिक्त कर्ज लेने की आवश्यकता क्यों पड़ी।

पूर्व मंत्री ने आरोप लगाया कि उन्नाव सहित कई जिलों में जमीन खरीद और क्रिकेट अधोसंरचना विकसित करने के नाम पर बड़ी धनराशि खर्च दिखाई गई, लेकिन धरातल पर अपेक्षित विकास कार्य नजर नहीं आते। उन्होंने दावा किया कि इन लेन-देन और खर्चों का उल्लेख आयकर विभाग को सौंपी गई बैलेंस शीट में भी दर्ज है, जिसकी जांच कराई जानी चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि बीसीसीआई से क्रिकेट के विकास के लिए प्राप्त धन का उपयोग प्रदेश में खेल सुविधाओं के विस्तार और युवा खिलाड़ियों को बेहतर अवसर देने के लिए होना चाहिए था। उनके अनुसार उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में आज भी यूपीसीए का अपना व्यापक स्तर का क्रिकेट ढांचा विकसित नहीं हो सका है, जबकि क्रिकेट विकास के लिए लगातार संसाधन उपलब्ध कराए जाते रहे हैं।

मोहसिन रज़ा ने आरोप लगाया कि क्रिकेट गतिविधियां कुछ चुनिंदा जिलों तक सीमित हैं और प्रदेश के अधिकांश जिलों के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को पर्याप्त अवसर नहीं मिल पा रहे हैं। उनका कहना है कि यदि क्रिकेट विकास का लाभ पूरे प्रदेश तक नहीं पहुंच रहा है तो इसके लिए जिम्मेदार लोगों को जवाब देना होगा।

उन्होंने कहा कि बीसीसीआई द्वारा उपलब्ध कराया गया धन किसी व्यक्ति विशेष या समूह का नहीं, बल्कि खिलाड़ियों और क्रिकेट के विकास के लिए है। एसोसिएशन के पदाधिकारी उसके मालिक नहीं बल्कि संरक्षक हैं और उन्हें पारदर्शिता तथा जवाबदेही के साथ कार्य करना चाहिए।

पूर्व मंत्री ने कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो इस मामले को न्यायालय तक ले जाया जाएगा। उन्होंने क्रिकेट प्रेमियों, पूर्व खिलाड़ियों और खेल से जुड़े लोगों से इस अभियान में शामिल होने की अपील करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश क्रिकेट को मजबूत, पारदर्शी और खिलाड़ियों के हितों के अनुरूप बनाना समय की मांग है।

हालांकि, इन आरोपों पर यूपीसीए की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि एसोसिएशन इन आरोपों का क्या जवाब देता है और क्या इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग आगे और जोर पकड़ती है।

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