सुरक्षा बनाम संवेदना: पाकिस्तानी मूल के सिख परिवार को हाईकोर्ट से राहत, 11 अगस्त को तय होगा भविष्य

नैनीताल/देहरादून। पांच साल पहले सरदार मनजीत सिंह अपने परिवार के साथ बेहतर और सुरक्षित भविष्य की उम्मीद लेकर भारत आए थे। इस दौरान उनकी बेटियां उच्च शिक्षा में आगे बढ़ीं, बेटे ने यहां स्कूल जाना शुरू किया और परिवार ने देहरादून को अपना घर बना लिया। लेकिन अब एक सरकारी नोटिस ने उनके सामने ऐसा सवाल खड़ा कर दिया है, जिसका जवाब केवल कानून ही नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और प्रशासनिक विवेक को भी तलाशना होगा।

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत से आने वाले मनजीत सिंह वर्ष 2019 में लॉन्ग टर्म वीजा (एलटीवी) पर भारत पहुंचे थे। उनका दावा है कि उनका वीजा वैध है और निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसका नवीनीकरण भी होता रहा है। वर्षों के दौरान परिवार ने देहरादून में अपना जीवन व्यवस्थित कर लिया। बड़ी बेटी बीटेक की पढ़ाई कर रही है, दूसरी बेटी बीडीएस कोर्स में अध्ययनरत है, जबकि सबसे छोटा बेटा स्कूल में शिक्षा प्राप्त कर रहा है।

इसी बीच राज्य सरकार की ओर से 31 मई को जारी एक नोटिस ने पूरे परिवार को असमंजस में डाल दिया। नोटिस में मनजीत सिंह को 24 घंटे के भीतर राज्य छोड़ने के निर्देश दिए गए थे। यह नोटिस उन्हें 2 जून को प्राप्त हुआ। परिवार का कहना है कि इतने कम समय में वर्षों से स्थापित जीवन, बच्चों की पढ़ाई और भविष्य की योजनाओं को छोड़ना संभव नहीं था।

इसके बाद मनजीत सिंह ने उत्तराखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि सुरक्षा संबंधी पहलुओं को देखते हुए विस्तृत जांच की आवश्यकता है और इसके लिए समय चाहिए। सरकार का कहना है कि जिस क्षेत्र में परिवार रह रहा है, वहां भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) का मुख्यालय स्थित है, इसलिए मामले का परीक्षण आवश्यक है।

वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने राज्य सरकार को अपना पक्ष रखने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है और मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त को निर्धारित की है। तब तक परिवार के खिलाफ जारी आदेश पर रोक बरकरार रहेगी।

यह मामला अब केवल एक नोटिस या वीजा संबंधी विवाद तक सीमित नहीं रह गया है। एक ओर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े प्रश्न हैं, वहीं दूसरी ओर एक ऐसा परिवार है जिसने वर्षों से भारत में रहकर अपनी सामाजिक और शैक्षणिक पहचान बनाई है। अदालत के समक्ष यही संतुलन सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभर रहा है।

देश में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) लागू होने के बाद पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए अल्पसंख्यक समुदायों के लिए भारतीय नागरिकता प्राप्त करने की प्रक्रिया आसान हुई है। उत्तराखंड में अब तक पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए 153 हिंदू और सिख शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता मिल चुकी है, जबकि कई अन्य मामलों पर अभी प्रक्रिया जारी है। ऐसे में मनजीत सिंह जैसे परिवारों की उम्मीदें भी इसी व्यवस्था से जुड़ी हुई हैं।

अब सभी की निगाहें 11 अगस्त पर टिकी हैं, जब अदालत इस मामले पर अगली सुनवाई करेगी। उस दिन केवल एक प्रशासनिक आदेश की वैधता पर ही नहीं, बल्कि सुरक्षा, मानवीय सरोकारों और वर्षों से भारत में रह रहे एक परिवार के भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों पर भी चर्चा होगी।

RNN के लिए Vinay Sheel Sharma की रिपोर्ट 

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