अयोध्या, 16 जून (यूएनएस)। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे में कथित गबन और दानपात्र से चोरी के मामले ने नया राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद खड़ा कर दिया है। मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की पड़ताल के बीच अब चढ़ावे की राशि, जेवरात और जमीन खरीद से जुड़े कथित अनियमितताओं को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। विपक्षी दलों ने जहां इसे करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा मामला बताते हुए दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है, वहीं ट्रस्ट के कई पदाधिकारी भी सवालों के घेरे में आ गए हैं।
सूत्रों के अनुसार, अब तक पकड़े गए संदिग्धों की निशानदेही पर करीब तीन करोड़ रुपये बरामद किए जा चुके हैं। शुरुआती स्तर पर कथित गबन की राशि आठ करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही थी, जबकि सोशल मीडिया पर यह आंकड़ा 200 करोड़ रुपये तक पहुंचने के दावे किए जा रहे हैं। हालांकि प्रशासन या जांच एजेंसियों की ओर से अभी तक किसी भी राशि की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
मामले को लेकर यह भी चर्चा है कि चढ़ावे में आए सोने-चांदी के आभूषणों में भी अनियमितताएं हुई हैं। सूत्रों के मुताबिक करोड़ों रुपये मूल्य के जेवरात और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं की जांच की जा रही है। कुछ चर्चाओं में दो किलोग्राम वजनी स्वर्ण गदा के गायब होने का दावा भी किया जा रहा है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
इस बीच आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद Sanjay Singh ने वाराणसी में प्रेस वार्ता कर राम मंदिर ट्रस्ट पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि 2.92 करोड़ रुपये मूल्य की नजूल भूमि को 24 करोड़ रुपये में खरीदा गया और इसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों को गिरफ्तार किया जाना चाहिए। संजय सिंह ने ट्रस्ट को भंग कर नई व्यवस्था बनाने की भी मांग की।
वहीं केंद्रीय मंत्री Anupriya Patel ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि के चढ़ावे में चोरी अक्षम्य अपराध है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है और जांच पूरी पारदर्शिता से होनी चाहिए।
सूत्रों के अनुसार, मंदिर में चढ़ावे की गिनती का कार्य आउटसोर्सिंग के माध्यम से कराया जा रहा था। आरोप हैं कि कई कर्मचारियों की नियुक्ति ट्रस्ट से जुड़े लोगों की सिफारिश पर हुई थी। कर्मचारियों के सत्यापन, नियमित निगरानी और तलाशी व्यवस्था में भी गंभीर खामियां सामने आने की चर्चा है। जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि कहीं बैंक और आउटसोर्सिंग एजेंसी के कुछ कर्मचारी या अधिकारी भी इस पूरे नेटवर्क का हिस्सा तो नहीं थे।
जानकारों का कहना है कि चढ़ावे में आने वाली राशि का वास्तविक आंकड़ा गिनती से पहले दर्ज नहीं होता था। दानपात्र खोले जाने के बाद पूरी नकदी एकत्र कर गिनती की जाती थी। ऐसे में गिनती शुरू होने से पहले या दौरान किसी भी कथित हेरफेर का सटीक अनुमान लगाना मुश्किल है। इसी वजह से कथित गबन की कुल राशि को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं।
सूत्र बताते हैं कि महाकुंभ और माघ मेले के दौरान अयोध्या में श्रद्धालुओं की संख्या में भारी वृद्धि हुई थी, जिससे चढ़ावे की रकम भी कई गुना बढ़ गई थी। आरोप है कि इसी अवधि में प्रतिदिन लाखों रुपये की कथित हेराफेरी की गई। हालांकि इन दावों की पुष्टि एसआईटी जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है। एसआईटी की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि चढ़ावे की राशि, जेवरात और अन्य संपत्तियों में कथित अनियमितताओं का वास्तविक स्वरूप क्या था और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
