होर्मुज जलडमरूमध्य में फिर शुरू हुई जहाजों की आवाजाही, शुक्रवार को हो सकता है अमेरिका-ईरान शांति समझौता

वॉशिंगटन/तेहरान, 15 जून 2026। अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध के बीच शांति की उम्मीदें तेज हो गई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही फिर शुरू हो गई है और दोनों देशों के बीच आगामी शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण शांति समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। यदि यह समझौता होता है तो अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच कई महीनों से जारी संघर्ष थम सकता है।

डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए कहा कि तेल से लदे कई जहाज अब होर्मुज जलमार्ग से निकलकर ओमान के समुद्री क्षेत्र वाले सुरक्षित मार्ग से आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने इसे सकारात्मक संकेत बताते हुए कहा कि क्षेत्र में सामान्य स्थिति बहाल होने की शुरुआत हो चुकी है।

हालांकि अमेरिकी सेना ने स्पष्ट किया है कि जब तक समझौते पर आधिकारिक हस्ताक्षर नहीं हो जाते, तब तक ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी पूरी तरह समाप्त नहीं की जाएगी। सैन्य अधिकारियों ने जहाजों को निर्देश दिया है कि नए आदेश मिलने तक वे प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश न करें।

पहले चरण में जलमार्ग खुलेगा, बाद में होगी बड़ी वार्ता

सूत्रों के अनुसार प्रारंभिक समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने और नौसैनिक नाकेबंदी हटाने पर सहमति बनी है। वहीं ईरान के परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंधों और अन्य विवादित मुद्दों पर अगले 60 दिनों तक अलग से बातचीत जारी रहेगी।

बारूदी सुरंगें बनीं सबसे बड़ी चुनौती

युद्ध के दौरान जलमार्ग में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटाना अभी भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। समुद्री सुरक्षा एजेंसियों का अनुमान है कि इन सुरंगों को पूरी तरह हटाने में 40 से 50 दिन का समय लग सकता है। इसके बाद ही जहाजों का सामान्य संचालन पूरी तरह बहाल हो सकेगा।

अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठनों के अनुसार इस समय करीब 500 जहाज और 20 हजार से अधिक कर्मचारी इस क्षेत्र में प्रभावित हैं। युद्ध के दौरान जहाजों पर कई हमलों की भी पुष्टि हुई है, जिससे वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई।

शुल्क और नियंत्रण पर अभी भी मतभेद

समझौते की दिशा में प्रगति के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य के नियंत्रण और शुल्क को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद बने हुए हैं। अमेरिका चाहता है कि यह अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग सभी देशों के लिए बिना किसी शुल्क के खुला रहे, जबकि ईरान का कहना है कि जलमार्ग का नियंत्रण उसके पास रहेगा और गुजरने वाले जहाजों से सेवा शुल्क लिया जाएगा।

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा है कि समझौते की मूल शर्तों पर सहमति बन चुकी है और अब उनमें बदलाव की संभावना नहीं है। वहीं ईरान के विदेश मंत्रालय ने संकेत दिया है कि शुल्क और नियंत्रण का मुद्दा अभी पूरी तरह सुलझा नहीं है।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह समझौता?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में गिना जाता है। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल और प्राकृतिक गैस इसी रास्ते से गुजरता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी देशों पर काफी हद तक निर्भर है। ऐसे में जलमार्ग के खुलने से तेल आपूर्ति सामान्य होने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर दबाव कम होने की उम्मीद है।

अब पूरी दुनिया की नजर शुक्रवार पर टिकी है, जब अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर होने की संभावना जताई जा रही है। यदि यह समझौता सफल रहा तो पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव कम होने की दिशा में यह एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।

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