लखनऊ, 12 जून 2026 (यूएनएस)। उत्तर प्रदेश में अनुदानित मदरसों में भर्ती पर सरकारी रोक के बावजूद कथित तौर पर 45 नियुक्तियां किए जाने का मामला सामने आने के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने संज्ञान लिया है। आयोग ने अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
मानवाधिकार कार्यकर्ता तलहा अंसारी की शिकायत के अनुसार, अप्रैल-मई 2025 के दौरान प्रदेश के कई अनुदानित मदरसों में नियुक्तियां की गईं, जबकि उस समय राज्य सरकार ने नई भर्तियों पर रोक लगा रखी थी। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि तत्कालीन रजिस्ट्रार की भूमिका में 45 से अधिक नियुक्तियां स्वीकृत की गईं।
शिकायत में प्रयागराज, गाजीपुर, कानपुर, अयोध्या और बाराबंकी के कई मदरसों का उल्लेख किया गया है, जहां नियमों की अनदेखी कर नियुक्तियां किए जाने का आरोप है। मामले की गंभीरता को देखते हुए एनएचआरसी ने विभाग से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
सूत्रों के अनुसार, इनमें से कई नियुक्तियों की जांच पहले से ही अल्पसंख्यक कल्याण निदेशालय स्तर पर चल रही है। वहीं राज्य सरकार मदरसों में शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए इसे शिक्षा सेवा चयन आयोग के माध्यम से कराने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत पात्रता परीक्षा और साक्षात्कार के आधार पर चयन किया जाएगा।
प्रदेश में लगभग 15 हजार मान्यता प्राप्त मदरसे संचालित हैं, जिनमें 12 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। मदरसा शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं को लेकर एनएचआरसी में 50 से अधिक शिकायतें लंबित बताई जा रही हैं।
अल्पसंख्यक कल्याण निदेशक शीलधर यादव ने कहा कि शिकायतों की जांच जारी है और जहां भी अनियमितताएं मिली हैं, वहां कार्रवाई की जा रही है। वहीं शिकायतकर्ता तलहा अंसारी का दावा है कि उन्होंने सभी संबंधित दस्तावेज आयोग को उपलब्ध करा दिए हैं।
