बांके बिहारी मंदिर पर संकट: ‘सांस’ नहीं ले पा रहे पत्थर, एएसआई की रिपोर्ट में खुली जर्जर होती दीवारों की परतें

मथुरा/वृंदावन, 12 जून 2026 (RNN)। वृंदावन स्थित प्रसिद्ध श्रीबांके बिहारी मंदिर की संरचना को लेकर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार मंदिर की दीवारों पर वर्षों पहले चढ़ाई गई पॉलीमर पेंट की परत के कारण लाल बलुई पत्थर अपनी प्राकृतिक प्रक्रिया के तहत “सांस” नहीं ले पा रहे थे, जिससे न केवल उनकी मजबूती प्रभावित हुई बल्कि दीवारों के जर्जर होने की प्रक्रिया भी तेज हो गई।

एएसआई द्वारा किए गए सर्वेक्षण में पाया गया कि वर्ष 1864 में निर्मित मंदिर की दीवारों पर बाद में पॉलीमर आधारित कोटिंग कर दी गई थी। विशेषज्ञों के मुताबिक यह कोटिंग पत्थरों की प्राकृतिक संरचना के लिए नुकसानदायक साबित हुई। इसके बाद एएसआई की विज्ञान शाखा की मदद से मंदिर की दीवारों से पॉलीमर की परत हटाने और वैज्ञानिक तरीके से केमिकल ट्रीटमेंट का कार्य शुरू किया गया।

विशेषज्ञों के अनुसार लाल बलुई पत्थर छिद्रयुक्त और प्राकृतिक रूप से सांस लेने वाला पत्थर होता है। इस पर कृत्रिम पेंट या पॉलीमर की परत चढ़ने से अंदर की नमी बाहर नहीं निकल पाती, जिससे पत्थर कमजोर होने लगता है। धूप और गर्मी के प्रभाव से नमी भाप में बदलकर पत्थरों में दरारें और परत उखड़ने जैसी समस्याएं पैदा करती है। कुछ मामलों में रासायनिक प्रतिक्रिया के कारण पत्थर भीतर से खोखले भी होने लगते हैं।

एएसआई की विज्ञान शाखा के विशेषज्ञ मंदिर की दीवारों की सफाई और उपचार में जुटे हैं। मुख्य प्रवेश द्वार समेत कई हिस्सों का उपचार पूरा हो चुका है, जबकि शेष कार्य जारी है। अधिकारियों का कहना है कि वैज्ञानिक उपचार के बाद लाल पत्थरों की आयु बढ़ेगी और मंदिर की मूल संरचना लंबे समय तक सुरक्षित रह सकेगी।

उधर, श्रीबांके बिहारी मंदिर क्षेत्र में जर्जर भवनों को लेकर भी प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। वर्ष 2023 में मंदिर के पास एक पुराने मकान का छज्जा गिरने से पांच श्रद्धालुओं की मौत के बाद नगर निगम ने सौ से अधिक जर्जर भवनों को नोटिस जारी किए थे। हालांकि, कई भवन स्वामियों ने अब तक मरम्मत नहीं कराई है।

नगर निगम अधिकारियों के अनुसार मंदिर क्षेत्र की गलियों में स्थित एक दर्जन से अधिक भवन आज भी हादसों को न्योता दे रहे हैं। ऐसे भवन स्वामियों को पुनः नोटिस जारी किए जा रहे हैं। चेतावनी दी गई है कि 15 दिन के भीतर मरम्मत नहीं कराने पर भवन मालिकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी।

नगर निगम निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता अमरेंद्र गौतम ने बताया कि लगातार नोटिस के बावजूद सुधार नहीं करने वाले भवन स्वामियों की सूची जिला प्रशासन को भेजी जाएगी। प्रशासन और पुलिस की मदद से नियमों का पालन सुनिश्चित कराया जाएगा ताकि मंदिर क्षेत्र में श्रद्धालुओं की सुरक्षा बनी रहे।

धार्मिक आस्था के प्रमुख केंद्र श्रीबांके बिहारी मंदिर की संरचना और आसपास के भवनों की स्थिति को देखते हुए अब संरक्षण और सुरक्षा दोनों मोर्चों पर प्रशासन सक्रिय दिखाई दे रहा है।

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