यूपीडा सीधे मुख्यमंत्री के अधीन, सपा ने साधा निशाना

लखनऊ, 09 जून 2026 (यूएनएस)। उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य की एक्सप्रेसवे और प्रमुख अवस्थापना परियोजनाओं के संचालन को लेकर महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव किया है। सरकार ने उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) का प्रशासनिक नियंत्रण औद्योगिक विकास विभाग से हटाकर अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग को सौंप दिया है। चूंकि अवस्थापना विकास विभाग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास है, इसलिए अब यूपीडा से संबंधित सभी महत्वपूर्ण फाइलें, प्रस्ताव और निर्णय सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय के माध्यम से निस्तारित होंगे।

सचिवालय प्रशासन अनुभाग-1 द्वारा जारी आदेश के अनुसार यह परिवर्तन विभागीय कार्यों में समन्वय बढ़ाने, कार्य आवंटन में मौजूद विरोधाभासों को समाप्त करने और निर्णय प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से किया गया है। आदेश के तहत यूपीडा से जुड़े सभी कार्य तत्काल प्रभाव से अवस्थापना विकास अनुभाग को हस्तांतरित कर दिए गए हैं।

इस फैसले के बाद औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी के पास से एक्सप्रेसवे परियोजनाओं की प्रशासनिक जिम्मेदारी हट गई है। अब तक यूपीडा के बजट, परियोजनाओं की स्वीकृति और अन्य महत्वपूर्ण प्रस्ताव औद्योगिक विकास विभाग के माध्यम से आगे बढ़ते थे, लेकिन नई व्यवस्था में इनकी निगरानी सीधे मुख्यमंत्री स्तर पर होगी।

सरकारी सूत्रों के अनुसार यूपीडा का मुख्य कार्य एक्सप्रेसवे, औद्योगिक कॉरिडोर और बड़ी अवस्थापना परियोजनाओं का विकास करना है। ऐसे में इसे अवस्थापना विकास विभाग के अधीन रखना अधिक उपयुक्त माना गया है। शासन का मानना है कि इससे निर्णय प्रक्रिया में तेजी आएगी और बड़े प्रोजेक्ट्स के क्रियान्वयन में अनावश्यक विलंब कम होगा।

उधर, इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जब सभी “घटिया एक्सप्रेसवे” बन गए और कथित भ्रष्टाचार का लक्ष्य पूरा हो गया, तब जिम्मेदारी बदलने का कोई अर्थ नहीं रह जाता।

अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा कि “अभी हाफ हुए हैं, आगे साफ हो जाएंगे।” उन्होंने दावा किया कि आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा और कई वर्तमान विधायकों के टिकट बदले जा सकते हैं। उन्होंने प्रदेश में कानून-व्यवस्था, महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की समस्याओं, पेपर लीक और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को लेकर भी सरकार की आलोचना की।

हालांकि राज्य सरकार का कहना है कि यह फैसला पूरी तरह प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने और अवस्थापना परियोजनाओं को तेज गति से आगे बढ़ाने के उद्देश्य से लिया गया है। सरकार को उम्मीद है कि नई व्यवस्था के तहत एक्सप्रेसवे, औद्योगिक कॉरिडोर और अन्य प्रमुख परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी।

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