लखनऊ, 08 जून 2026 (यूएनएस)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को लखनऊ में क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि किसानों को मौसम की सटीक और समय पर जानकारी उपलब्ध होने से फसलों को होने वाले नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है तथा संभावित खाद्यान्न संकट से भी बचाव संभव है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार मौसम संबंधी आधुनिक तकनीकों के विस्तार पर लगातार काम कर रही है। उत्तर प्रदेश में 450 ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन तथा विभिन्न ब्लॉकों में 2000 ऑटोमेटिक रेन गेज सेंटर स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा आजमगढ़, वाराणसी, अलीगढ़, झांसी और लखनऊ में एक्स-बैंड डॉप्लर वेदर रडार लगाए गए हैं, जिनसे आंधी, तूफान और वर्षा की निगरानी में महत्वपूर्ण सहायता मिल रही है। साथ ही आकाशीय बिजली की घटनाओं की निगरानी के लिए डिटेक्शन सेंटर भी स्थापित किए गए हैं।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मौसम चक्र में लगभग एक महीने का बदलाव देखने को मिल रहा है, जिसका सीधा असर कृषि और फसलों पर पड़ रहा है। उन्होंने चिंता जताई कि यदि यह स्थिति लगातार बनी रही तो भविष्य में वैश्विक स्तर पर खाद्यान्न संकट की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। उन्होंने कहा कि प्रकृति के अंधाधुंध दोहन के कारण पर्यावरणीय असंतुलन बढ़ा है और मानव समाज को प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझना होगा।
मुख्यमंत्री ने मौसम विभाग की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि आज मौसम संबंधी पूर्वानुमान पहले की तुलना में अधिक सटीक हो गए हैं। आंधी, बारिश और तूफान की अग्रिम चेतावनी मिलने से किसान अपनी फसलों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठा पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि लखनऊ में क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र की स्थापना से प्रदेश के किसानों और आम नागरिकों को बड़ा लाभ मिलेगा।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश देश की सबसे बड़ी आबादी वाला राज्य होने के साथ-साथ खाद्यान्न उत्पादन में भी अग्रणी है। प्रदेश के पास देश की कुल कृषि भूमि का लगभग 11 प्रतिशत हिस्सा है, लेकिन यहां देश के कुल खाद्यान्न उत्पादन का करीब 21 प्रतिशत उत्पादन होता है। ऐसी स्थिति में किसानों तक मौसम की सटीक जानकारी पहुंचाना अत्यंत आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नए क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र के माध्यम से किसानों को बारिश, ओलावृष्टि और अन्य मौसमीय घटनाओं की समय पर जानकारी उपलब्ध हो सकेगी। इससे खेती-किसानी से जुड़े निर्णय लेने में आसानी होगी और फसल नुकसान को कम किया जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र, भारत मौसम विज्ञान विभाग के राष्ट्रीय नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके माध्यम से स्थानीय स्तर पर मौसम का अधिक सटीक आकलन, डेटा विश्लेषण और समयबद्ध चेतावनी जारी करने की व्यवस्था को और मजबूत बनाया जा सकेगा।
