उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को भेजा कुंभ का न्योता

वाराणसी, 06 जून (यूएनएस)। उत्तराखंड सरकार ने वर्ष 2027 में हरिद्वार में आयोजित होने वाले कुंभ मेले की तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को औपचारिक निमंत्रण भेजकर कुंभ मेले में शामिल होने का आग्रह किया है। मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में कहा है कि शंकराचार्य की उपस्थिति से कुंभ आयोजन और अधिक दिव्य एवं आध्यात्मिक रूप से समृद्ध होगा तथा उनके आशीर्वाद से करोड़ों श्रद्धालुओं को नई ऊर्जा और प्रेरणा प्राप्त होगी।

मुख्यमंत्री द्वारा भेजे गए पत्र में कहा गया है कि हिमालय की पवित्र भूमि सदियों से धर्म, अध्यात्म और सनातन संस्कृति की वाहक रही है। बदरिकाश्रम और ज्योतिर्मठ की परंपरा भारतीय आध्यात्मिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने लिखा कि वर्ष 2027 का हरिद्वार कुंभ केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का महापर्व होगा, जिसमें देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु भाग लेंगे।

मुख्यमंत्री ने पत्र में उल्लेख किया कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की उपस्थिति मात्र किसी संत की मौजूदगी नहीं होगी, बल्कि सनातन परंपरा के आशीर्वाद का प्रतीक होगी। उनके प्रवचन और मार्गदर्शन से श्रद्धालुओं को धर्म के प्रति नई प्रेरणा मिलेगी और आयोजन को आध्यात्मिक मजबूती प्राप्त होगी।

पत्र में लिखा—आपके आगमन से आयोजन होगा और अधिक दिव्य, श्रद्धालुओं को मिलेगी नई आध्यात्मिक ऊर्जा

शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी संजय पांडे ने बताया कि 5 जून को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से कुंभ मेले में शामिल होने का निमंत्रण प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती वर्ष 2027 में हरिद्वार में आयोजित होने वाले कुंभ मेले में शामिल होंगे।

संजय पांडे ने कहा कि शंकराचार्य की मान्यता को लेकर उठे विवादों पर उत्तराखंड सरकार ने आवश्यक स्पष्टीकरण दे दिया है। उन्होंने बताया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का पट्टाभिषेक श्रृंगेरी मठ के शंकराचार्य द्वारा किया गया था और पूर्व शंकराचार्य द्वारा बनाई गई वसीयत भी सार्वजनिक है। उन्होंने कहा कि देशभर में उन्हें शंकराचार्य के रूप में स्वीकार किया जाता है।

उल्लेखनीय है कि माघ मेले के दौरान प्रशासन और शंकराचार्य के बीच विवाद के बाद उन्होंने मेला छोड़ दिया था और काशी चले गए थे। काशी पहुंचने के बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार से गौमाता को राज्य माता का दर्जा देने की मांग करते हुए 40 दिन का अल्टीमेटम दिया था। वर्तमान में वह इसी मांग को लेकर प्रदेशभर की यात्रा कर रहे हैं और विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में जनसभाओं को संबोधित कर रहे हैं।

इससे पूर्व 25 जनवरी को भी उत्तराखंड सरकार ने बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने के अवसर पर शंकराचार्य को औपचारिक निमंत्रण भेजा था। उन्हें 8 अप्रैल को ऋषिकेश से बद्रीनाथ धाम तक निकलने वाली पारंपरिक गाड़ू घड़ा यात्रा में शामिल होने का आग्रह किया गया था, जिसमें उन्होंने सहभागिता भी की थी।

गाड़ू घड़ा यात्रा बद्रीनाथ धाम की प्रमुख धार्मिक परंपराओं में शामिल है। इसके माध्यम से भगवान बद्री विशाल के अभिषेक और अखंड ज्योति के लिए उपयोग होने वाला तिल का तेल धाम तक पहुंचाया जाता है। इसी यात्रा के साथ चारधाम यात्रा की औपचारिक शुरुआत भी मानी जाती है।

अब हरिद्वार कुंभ 2027 के लिए भेजे गए इस निमंत्रण को धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि शंकराचार्य की भागीदारी से कुंभ मेले की धार्मिक गरिमा और बढ़ेगी।

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