भारत पर दबाव का उल्टा असर होगा, मोदी के नेतृत्व में स्वतंत्र फैसले लेता है भारत: पुतिन

नई दिल्ली, 6 जून 2026, (Agency)। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक बार फिर भारत और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व की खुलकर प्रशंसा करते हुए कहा है कि भारत एक संप्रभु और स्वतंत्र राष्ट्र है, जो अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर निर्णय लेता है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भारत पर किसी भी प्रकार का बाहरी दबाव या प्रतिबंध लगाने की कोशिश का उल्टा असर होगा।

सेंट पीटर्सबर्ग अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मंच को संबोधित करते हुए पुतिन ने भारत-रूस संबंधों को भरोसे, मित्रता और भाईचारे पर आधारित बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच 1947 से स्थापित राजनयिक संबंध समय के साथ और मजबूत हुए हैं तथा यह साझेदारी किसी राजनीतिक परिस्थिति पर निर्भर नहीं करती।

पुतिन ने कहा कि भारत ने हमेशा एक स्वतंत्र राष्ट्र की तरह व्यवहार किया है और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश अपने हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है। उन्होंने कहा कि यदि भारत पर प्रतिबंध लगाने या दबाव बनाने का कोई प्रयास किया जाता है तो उसका परिणाम अपेक्षा के विपरीत होगा।

रूसी राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री मोदी के पुराने अमेरिकी वीजा विवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि एक समय ऐसा भी था जब मोदी के अमेरिका जाने पर प्रतिबंध था, लेकिन आज वे भारत के प्रधानमंत्री हैं और सभी प्रतिबंध समाप्त हो चुके हैं। उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बदलती परिस्थितियों और नेतृत्व की शक्ति का उदाहरण बताया।

भारत की क्षमता और प्रतिभा की सराहना करते हुए पुतिन ने कहा कि भारतीय नागरिक अत्यंत प्रतिभाशाली, शिक्षित और नवाचार में अग्रणी हैं। विशेष रूप से सूचना प्रौद्योगिकी, कोडिंग और तकनीकी क्षेत्रों में भारतीयों की योग्यता को पूरी दुनिया मान्यता देती है।

उन्होंने कहा कि रूस और भारत के बीच आर्थिक तथा तकनीकी सहयोग लगातार बढ़ रहा है। दोनों देशों की कंपनियां ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, उद्योग और आपूर्ति श्रृंखला के क्षेत्र में मिलकर काम कर रही हैं। रूस भारतीय बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप सहयोग बढ़ाने और तकनीकी समाधान साझा करने के लिए प्रतिबद्ध है।

पुतिन ने यह भी कहा कि भारत को यह तय करने का पूरा अधिकार है कि वह किन उत्पादों और तकनीकों को अपनाना चाहता है। भारत गुणवत्ता, कीमत और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए अपने फैसले स्वयं लेता है और यही उसकी सबसे बड़ी ताकत है।

रूस के राष्ट्रपति ने कहा कि भारत के साथ रूस का सहयोग किसी तीसरे देश के दबाव से प्रभावित नहीं होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि कोई भी देश रूस को यह निर्देश नहीं दे सकता कि वह भारत के साथ किस प्रकार के संबंध रखे या कौन-सा सहयोग करे। रूस अपने मित्र देशों, विशेष रूप से भारत के साथ किए गए वादों को हमेशा निभाता रहेगा।

विश्लेषकों का मानना है कि पुतिन का यह बयान ऐसे समय आया है जब वैश्विक राजनीति में प्रतिबंधों, व्यापारिक दबावों और सामरिक प्रतिस्पर्धा को लेकर चर्चा तेज है। रूस की ओर से भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और स्वतंत्र विदेश नीति का समर्थन दोनों देशों के मजबूत संबंधों का संकेत माना जा रहा है।

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