लखनऊ, 05 जून 2026। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री Mayawati ने पार्टी की हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर इकाइयों की समीक्षा बैठक में कार्यकर्ताओं को सख्त संदेश देते हुए कहा कि केवल बयानबाजी से पार्टी मजबूत नहीं होगी, बल्कि जमीनी स्तर पर काम और चुनावी नतीजों पर विशेष ध्यान देना होगा।
शुक्रवार को आयोजित बैठक में मायावती ने दोनों राज्यों की संगठनात्मक गतिविधियों और राजनीतिक परिस्थितियों की समीक्षा की। उन्होंने कार्यकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत प्रगति रिपोर्ट का मूल्यांकन करते हुए कहा कि बहुजन समाज को अपने वोट की सुरक्षा को आत्मसम्मान, इज्जत और अधिकारों से जोड़कर देखना होगा। उन्होंने कहा कि अंबेडकरवादी मिशन को आगे बढ़ाने के लिए संगठनात्मक मजबूती के साथ चुनावी सफलता भी आवश्यक है।
बैठक में हिमाचल प्रदेश की राजनीतिक स्थिति पर चर्चा करते हुए मायावती ने कहा कि वहां की जनता कांग्रेस और भाजपा दोनों से निराश नजर आ रही है। ऐसे में बसपा के पास एक मजबूत और विश्वसनीय विकल्प के रूप में उभरने का अवसर है। उन्होंने नेताओं को निर्देश दिया कि वे जनता के बीच जाकर स्थानीय समस्याओं को उठाएं और संगठन को गांव-गांव तक मजबूत करें।
जम्मू-कश्मीर के संबंध में कार्यकर्ताओं ने पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल किए जाने में हो रही देरी का मुद्दा उठाया। इस पर मायावती ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्र सरकार को वहां के लोगों की भावनाओं और अपेक्षाओं का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने पार्टी नेताओं से कहा कि वे जनता की समस्याओं को प्रमुखता से उठाते हुए बसपा को आम लोगों की आवाज बनाएं।
बसपा प्रमुख ने कहा कि हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर सहित देश के कई हिस्सों में बहुजन समाज गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्षा और पिछड़ेपन जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। इन समस्याओं के समाधान के लिए समाज को राजनीतिक रूप से जागरूक और संगठित होना होगा।
उन्होंने कार्यकर्ताओं से जातिवादी और सांप्रदायिक राजनीति के विभिन्न हथकंडों का मुकाबला करते हुए अंबेडकरवादी विचारधारा को मजबूत करने का आह्वान किया। बैठक में मौजूद पदाधिकारियों ने क्षेत्रवार रिपोर्ट प्रस्तुत की और संगठन को मजबूत बनाने के लिए जमीनी स्तर पर अभियान तेज करने का संकल्प लिया।
