10 हजार डुप्लीकेट वोटर मिलने का दावा, सपा ने चुनाव आयोग से मांगी उच्चस्तरीय जांच

नोएडा, 03 जून (यूएनएस)। समाजवादी पार्टी ने नोएडा विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए भारत निर्वाचन आयोग से उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। पार्टी का दावा है कि स्थानीय स्तर पर किए गए परीक्षण में करीब 10 हजार डुप्लीकेट मतदाताओं की पहचान हुई है।

समाजवादी पार्टी के नोएडा महानगर अध्यक्ष आश्रय गुप्ता द्वारा मुख्य निर्वाचन आयुक्त को भेजे गए पत्र में आरोप लगाया गया है कि मतदाता सूची में बड़ी संख्या में ऐसे नाम शामिल हैं, जिनके नाम पर एक से अधिक मतदाता पहचान पत्र जारी किए गए हैं। पार्टी के अनुसार कई व्यक्तियों के नाम दो, तीन, चार और कुछ मामलों में इससे भी अधिक बार दर्ज पाए गए हैं। साथ ही कई मतदाताओं के नाम अलग-अलग मतदान केंद्रों की सूचियों में भी दर्ज होने का दावा किया गया है।

पत्र में कहा गया है कि हाल ही में निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान को पारदर्शी और तकनीकी रूप से सक्षम प्रक्रिया बताया गया था। ऐसे में बड़ी संख्या में कथित डुप्लीकेट मतदाताओं का सामने आना गंभीर चिंता का विषय है।

समाजवादी पार्टी ने निर्वाचन आयोग से सवाल किया है कि यदि यह मामला प्रशासनिक लापरवाही का है, तो अब तक संबंधित अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है। पार्टी ने यह भी पूछा है कि आधुनिक तकनीकी सत्यापन व्यवस्था के बावजूद एक ही व्यक्ति के नाम पर कई मतदाता पहचान पत्र और विभिन्न मतदान केंद्रों पर पंजीकरण कैसे संभव हुआ।

पार्टी ने नोएडा विधानसभा क्षेत्र की संपूर्ण मतदाता सूची का स्वतंत्र निरीक्षण और पुनः सत्यापन कराने की मांग की है। साथ ही डुप्लीकेट मतदाताओं के नाम हटाने के लिए समयबद्ध कार्रवाई तथा संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की भी मांग उठाई है।

समाजवादी पार्टी ने अपने पत्र में कहा है कि उसका उद्देश्य किसी संस्था की छवि को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और विश्वसनीय बनाना है। पार्टी ने निर्वाचन आयोग से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराकर तथ्यों को सार्वजनिक करने की मांग की है।

हालांकि निर्वाचन आयोग की ओर से इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो यह मामला मतदाता सूची की शुद्धता और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़ा एक महत्वपूर्ण विषय बन सकता है।

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