पांच दिवसीय भारत दौरे पर म्यांमार के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री मोदी से करेंगे मुलाकात

नई दिल्ली, 30 मई 2026। म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग शनिवार से भारत की पांच दिवसीय यात्रा पर पहुंचे। उनकी इस यात्रा का उद्देश्य भारत और म्यांमार के बीच व्यापार, संपर्क, सीमा सुरक्षा तथा रक्षा सहयोग को और मजबूत बनाना है। राष्ट्रपति ह्लाइंग ने अपनी यात्रा की शुरुआत बिहार के बोधगया स्थित महाबोधि मंदिर में दर्शन-पूजन के साथ की। इसके बाद वह नई दिल्ली के लिए रवाना हुए।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने राष्ट्रपति ह्लाइंग के भारत आगमन का स्वागत करते हुए कहा कि यह यात्रा दोनों देशों के बीच मौजूद गहरे आध्यात्मिक, ऐतिहासिक और जन-स्तरीय संबंधों को प्रतिबिंबित करती है। उन्होंने कहा कि यह दौरा भारत और म्यांमार के बीच निरंतर बढ़ते सहयोग को नई दिशा देगा।

बोधगया हवाई अड्डे पर म्यांमार के राष्ट्रपति का स्वागत बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन ने किया। राष्ट्रपति बनने के दो महीने से भी कम समय बाद भारत की यह उनकी पहली आधिकारिक यात्रा है।

म्यांमार में संसदीय चुनावों के बाद राष्ट्रपति बने यू मिन आंग ह्लाइंग इससे पहले लगभग पांच वर्षों तक देश के सैन्य शासन का नेतृत्व कर चुके हैं। वर्ष 2021 में सेना द्वारा सत्ता संभालने के बाद म्यांमार लंबे समय तक राजनीतिक अस्थिरता और विरोध प्रदर्शनों का सामना करता रहा है।

राष्ट्रपति ह्लाइंग के साथ एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है, जिसमें कई मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और व्यापार जगत के प्रतिनिधि शामिल हैं। यात्रा के दौरान वह विभिन्न व्यापारिक और औद्योगिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे तथा भारतीय उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात करेंगे।

विदेश मंत्रालय के अनुसार एक जून को राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच द्विपक्षीय वार्ता होगी। बैठक में दोनों देशों के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों को और मजबूत बनाने के साथ-साथ सीमा सुरक्षा, संपर्क परियोजनाओं, व्यापार और रक्षा सहयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जाएगी।

इसके बाद दो जून को राष्ट्रपति ह्लाइंग मुंबई जाएंगे, जहां वह उद्योग एवं व्यापार क्षेत्र से जुड़े कार्यक्रमों में भाग लेंगे और विभिन्न संस्थानों का दौरा करेंगे।

विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारत की ‘पड़ोसी प्रथम’, ‘एक्ट ईस्ट’ और ‘महासागर’ नीति में म्यांमार का विशेष महत्व है। भारत और म्यांमार के बीच लगभग 1,640 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है, जो पूर्वोत्तर के कई राज्यों से जुड़ती है। ऐसे में सीमा प्रबंधन, सुरक्षा सहयोग और संपर्क परियोजनाएं दोनों देशों के संबंधों का अहम हिस्सा हैं।

सूत्रों के अनुसार राष्ट्रपति ह्लाइंग की इस यात्रा के दौरान रक्षा सहयोग को और विस्तार देने, व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने तथा क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है। दोनों देशों को उम्मीद है कि यह दौरा द्विपक्षीय संबंधों को नई गति प्रदान करेगा और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाएगा।

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