लखनऊ, 30 मई 2026 (यूएनएस)। भारतीय सेनाओं के बढ़ते गौरव, स्वदेशी रक्षा क्षमता और हालिया सैन्य उपलब्धियों के बीच राजधानी लखनऊ को एक नई पहचान मिली है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तथा नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने शनिवार को गोमती नदी तट पर लगभग 19 करोड़ रुपये की लागत से विकसित नौसेना शौर्य वाटिका का लोकार्पण किया। इस अनूठी वाटिका में भारतीय नौसेना के सेवानिवृत्त युद्धपोत आईएनएस गोमती को उसके मूल स्वरूप में स्थापित किया गया है, जो युवाओं को देशभक्ति, सैन्य पराक्रम और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति प्रेरित करेगा।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि किसी भी राष्ट्र के विकास की सबसे बड़ी आधारशिला उसकी सुरक्षा होती है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में असुरक्षा, दंगे, कर्फ्यू और माफिया राज का माहौल था, जिससे निवेश और विकास प्रभावित होता था। आज कानून-व्यवस्था में सुधार और सुरक्षित वातावरण के कारण प्रदेश देश की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब देश का सैनिक सीमाओं पर अपने कर्तव्य का निर्वहन करता है, तब नागरिकों का भी दायित्व बनता है कि वे सेना और वर्दीधारियों के प्रति सम्मान का भाव रखें। इसी सोच के साथ लखनऊ में नौसेना संग्रहालय और शौर्य वाटिका की परिकल्पना की गई थी, जो अब साकार रूप ले चुकी है।
उन्होंने कहा कि विश्व में शांति का सम्मान वही राष्ट्र करा सकता है जो अपनी सुरक्षा को लेकर मजबूत और सजग हो। यदि कोई शक्ति भारत की संप्रभुता और सुरक्षा को चुनौती देती है तो केवल उपदेशों से काम नहीं चलता, उसे उसी की भाषा में जवाब देना पड़ता है। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘पंच प्रण’ का उल्लेख करते हुए कहा कि विकसित भारत के निर्माण में प्रत्येक नागरिक की भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने विश्वास जताया कि नौसेना शौर्य वाटिका युवाओं में राष्ट्रभक्ति और सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि भारत की सामरिक शक्ति का लोहा आज पूरी दुनिया मान रही है। उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और ब्रह्मोस मिसाइल की सफलता का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय रक्षा क्षमता लगातार मजबूत हो रही है। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रयागराज महाकुंभ जैसे बड़े आयोजनों में नौसेना की विशेष प्रदर्शनी लगाई जानी चाहिए, ताकि देश-विदेश से आने वाले लोग भारतीय नौसेना की ताकत और उपलब्धियों को करीब से जान सकें।
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि लखनऊ की धरती 1857 की क्रांति से लेकर कारगिल युद्ध तक वीरता और बलिदान की साक्षी रही है। नौसेना शौर्य वाटिका इस गौरवशाली परंपरा में एक नया अध्याय जोड़ने का कार्य करेगी।
नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने कहा कि भले ही उत्तर प्रदेश समुद्र तट वाला राज्य नहीं है, लेकिन इसकी नदियां और यहां के युवाओं का योगदान देश की रक्षा में महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने बताया कि गोमती नदी के नाम पर बने युद्धपोत आईएनएस गोमती ने 34 वर्षों तक भारतीय नौसेना में उल्लेखनीय सेवा दी और अब उसका गौरवशाली इतिहास लखनऊ में आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगा।
उन्होंने कहा कि शौर्य वाटिका में नौसेना के विभिन्न प्लेटफॉर्म, आधुनिक रक्षा तकनीक, उत्तर प्रदेश रक्षा औद्योगिक गलियारा तथा ब्रह्मोस निर्माण परियोजना से जुड़ी जानकारियां भी उपलब्ध कराई गई हैं। इससे युवाओं में सैन्य सेवाओं के प्रति आकर्षण बढ़ेगा और वे राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे।
नौसेना शौर्य वाटिका में स्थापित आईएनएस गोमती के अलावा एंकर, एके-726 मध्यम दूरी की तोप, सीईटी-53एम पनडुब्बी अवरोधक प्रणाली, जिफ-101 लॉन्चर, कैपस्टन ड्रम, मुख्य मस्तूल तथा जहाज का प्रोपेलर भी प्रदर्शित किया गया है। वर्ष 2022 में सेवा से सेवानिवृत्त हुए इस युद्धपोत को देखने और उसके इतिहास को जानने के लिए बड़ी संख्या में लोगों के आने की संभावना है। अधिकारियों के अनुसार यह वाटिका राष्ट्रीय सुरक्षा, सैन्य विरासत और देशभक्ति के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनेगी।
