प्री-प्राइमरी शिक्षा की नींव मजबूत कर रही सरकार, ‘किताब वितरण ऐप’ से होगी रियल टाइम मॉनिटरिंग

लखनऊ, 27 मई 2026 (यूएनएस)। उत्तर प्रदेश की उत्तर प्रदेश सरकार प्री-प्राइमरी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। योगी सरकार अब प्राथमिक और उच्च प्राथमिक शिक्षा के साथ-साथ शुरुआती बाल्यावस्था शिक्षा को भी आधुनिक और गतिविधि आधारित बनाने पर जोर दे रही है। इसी क्रम में प्रदेश के को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों और बालवाटिकाओं में 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के लिए आधुनिक शिक्षण सामग्री का वितरण शुरू किया गया है।

सरकार की ओर से ‘चहक-1’, ‘चहक-2’, ‘चहक-3’, ‘कदम’, ‘कलांकुर’, बिग बुक, होलिस्टिक रिपोर्ट कार्ड और बालवाटिका पुस्तिका जैसी सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। इन संसाधनों के माध्यम से लाखों बच्चों को शुरुआती शिक्षा के लिए बेहतर और रोचक वातावरण देने की तैयारी की गई है।

यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उस विजन को जमीन पर उतारने की दिशा में अहम मानी जा रही है, जिसमें प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ईसीसीई) को बच्चों की सीखने की मजबूत नींव माना गया है। सरकार अब आंगनबाड़ी केंद्रों को केवल पोषण और देखभाल तक सीमित न रखकर उन्हें प्रारंभिक शिक्षा के सक्रिय केंद्रों के रूप में विकसित करने पर काम कर रही है।

जानकारी के अनुसार को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों और बालवाटिकाओं में आयु वर्ग के अनुसार शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। इसके तहत बालवाटिका हस्तपुस्तिका, 12 प्रकार की बिग बुक, शिक्षण तालिकाएं और होलिस्टिक रिपोर्ट कार्ड भी वितरित किए जाएंगे।

प्रदेश में पहले से ही बेसिक शिक्षा विभाग के तहत स्मार्ट स्कूल, ऑपरेशन कायाकल्प, डिजिटल मॉनिटरिंग और निपुण भारत मिशन जैसे अभियान संचालित किए जा रहे हैं। अब प्री-प्राइमरी शिक्षा को भी इसी व्यापक शिक्षा सुधार अभियान से जोड़ते हुए बच्चों की शुरुआती सीखने की क्षमता को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार 3 से 6 वर्ष की आयु बच्चों के मानसिक, भाषाई और सामाजिक विकास की सबसे महत्वपूर्ण अवस्था होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार खेल आधारित, गतिविधि आधारित और बाल-केंद्रित शिक्षण पद्धति को बढ़ावा दे रही है।

शिक्षण सामग्री वितरण प्रक्रिया को पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के लिए सरकार ने ‘किताब वितरण ऐप’ लागू किया है। इसके माध्यम से रियल टाइम मॉनिटरिंग की जाएगी। वितरण व्यवस्था की निगरानी और स्कैनिंग की जिम्मेदारी बीएसए, बीईओ, प्रधानाध्यापक, एआरपी, एसआरजी और डायट मेंटरों को सौंपी गई है।

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