वाराणसी, 29 अप्रैल 2026 (यूएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वाराणसी दौरे ने बुधवार को आस्था, उत्साह और जनसमर्थन का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत किया। अपने संसदीय क्षेत्र पहुंचे प्रधानमंत्री ने काशी विश्वनाथ मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना कर देश की सुख-समृद्धि की कामना की।
गर्भगृह में 20 मिनट पूजा, त्रिशूल लहराया
प्रधानमंत्री ने मंदिर के गर्भगृह में करीब 20 मिनट तक पूजा-अर्चना की। पांच वैदिक पंडितों ने पूरे विधि-विधान से उनका पूजन कराया, उन्हें माला पहनाई और त्रिपुंड तिलक लगाया। पूजा के बाद मंदिर परिसर में भाजपा नेताओं ने प्रधानमंत्री को त्रिशूल और डमरू भेंट किया, जिसे उन्होंने श्रद्धा के साथ स्वीकार करते हुए त्रिशूल लहराया।

108 बटुकों के शंखनाद से हुआ स्वागत
प्रधानमंत्री के मंदिर पहुंचने पर प्रवेश द्वार पर 108 बटुकों ने वैदिक मंत्रोच्चार और शंखनाद के साथ उनका भव्य स्वागत किया। यह दृश्य आध्यात्मिक ऊर्जा और सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक बन गया। मंदिर परिसर में प्रधानमंत्री ने बच्चों से भी मुलाकात की और उनसे आत्मीय संवाद किया।

14 किलोमीटर लंबा ऐतिहासिक रोड शो
मंदिर पहुंचने से पहले प्रधानमंत्री ने वाराणसी में लगभग 14 किलोमीटर लंबा रोड शो किया, जिसे अब तक का सबसे बड़ा रोड शो माना जा रहा है। रोड शो के दौरान जगह-जगह लोगों ने पुष्प वर्षा कर उनका स्वागत किया। भाजपा कार्यकर्ता ढोल-नगाड़ों पर नाचते नजर आए और पूरे मार्ग पर उत्सव जैसा माहौल बना रहा।
प्रधानमंत्री ने अपने वाहन से हाथ हिलाकर जनता का अभिवादन स्वीकार किया। इस दौरान पांच प्रमुख स्थानों पर जनप्रतिनिधियों और पार्टी पदाधिकारियों ने उनका स्वागत किया।
काशी दौरे की खासियत
यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पिछले 11 वर्षों में 54वां काशी दौरा रहा, जबकि वर्ष 2026 का यह उनका पहला दौरा है। इससे पहले वह नवंबर 2025 में वाराणसी आए थे।
गंगा एक्सप्रेसवे उद्घाटन के लिए हरदोई रवाना
काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजा के बाद प्रधानमंत्री वाराणसी से हरदोई के लिए रवाना हो गए, जहां उन्होंने 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया। यह एक्सप्रेसवे मेरठ को प्रयागराज से जोड़ेगा और प्रदेश की कनेक्टिविटी को नई गति देगा।
आस्था, विकास और जनसमर्थन का संगम
प्रधानमंत्री का यह दौरा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें विकास और जनसंपर्क की झलक भी स्पष्ट दिखाई दी। काशी की सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब, मंदिर में आध्यात्मिक वातावरण और विकास परियोजनाओं की शुरुआत—इन सभी ने इस दौरे को यादगार बना दिया।
