यूपी में हालिया घटनाएं डरावनी, न्याय के लिए भटक रहे पीड़ित परिवार: स्वामी प्रसाद मौर्य

लखनऊ, 29 अप्रैल 2026 (यूएनएस)। राजधानी लखनऊ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्वामी प्रसाद मौर्य ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में बढ़ती आपराधिक घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं और इससे आम लोगों में भय का माहौल बन गया है।

मौर्य ने 24, 25 और 27 अप्रैल को हुई घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि ये मामले इस बात का संकेत हैं कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं के खिलाफ अपराध, हत्या और सामूहिक अत्याचार जैसी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जिससे लोगों में असुरक्षा की भावना गहराती जा रही है।

उन्होंने बताया कि 24 अप्रैल को एक युवती की हत्या का मामला सामने आया, जबकि 25-26 अप्रैल को प्रतापगढ़ में 19 वर्षीय युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या कर शव पेड़ पर लटका दिया गया। इस मामले में मुख्य आरोपी अभी भी फरार है और उस पर इनाम घोषित किया गया है।

इसी क्रम में 27 अप्रैल को एटा में हुई गोलीबारी की घटना का भी उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इसमें एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हुआ, जिसका इलाज आगरा के अस्पताल में चल रहा है।

मौर्य ने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब ऐसी घटनाएं सामने आई हैं। उन्होंने गाजीपुर और हरदोई की पिछली घटनाओं का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि कई मामलों में पीड़ितों को अब तक न्याय नहीं मिल पाया है।

उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि बार-बार मुद्दा उठाने के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है, जिससे अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। कई मामलों में आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं और पीड़ित परिवार न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।

मौर्य ने मांग की कि सभी आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए, मामलों की सुनवाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट में कराई जाए और पीड़ित परिवारों को सुरक्षा के साथ उचित मुआवजा दिया जाए। साथ ही, लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की भी मांग की।

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए तो जनता के साथ मिलकर बड़ा आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि प्रदेश की बहन-बेटियों की सुरक्षा और न्याय का सवाल है, जिस पर किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।

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