ईरान का अद्भुत जज्बा दुनिया के लिए मिसाल

लेखक:

सर्वमित्रा सुरजन


संकट की घड़ी में किसी राष्ट्र की असली ताकत उसके हथियारों से नहीं, बल्कि उसके नागरिकों के जज्बे और एकजुटता से मापी जाती है। ईरान ने हाल के घटनाक्रमों के बीच यही साबित किया है कि राष्ट्र केवल भूगोल नहीं, बल्कि भावनाओं, संस्कृति और सामूहिक संकल्प का नाम होता है।

Titanic के एक प्रसिद्ध दृश्य का उल्लेख इस संदर्भ में सटीक प्रतीक बनकर उभरता है—जहाज डूब रहा है, अफरा-तफरी मची है, लेकिन संगीतकार अंत तक अपना संगीत बजाते रहते हैं। मौत के साये में भी जीवन का उत्सव मनाने का यह साहस ही मानवता की पहचान है। ठीक ऐसा ही दृश्य तब देखने को मिला जब ईरान के संगीतकार अली गमसारी ने तेहरान के दमावंद बिजली संयंत्र के सामने बैठकर बम धमाकों के बीच संगीत साधना शुरू की।

यह केवल कला नहीं थी, बल्कि एक संदेश था—डर के सामने झुकने के बजाय संस्कृति और सृजन के माध्यम से जवाब देना। उनके साथ अन्य कलाकार भी जुड़े और यह एक प्रतीकात्मक प्रतिरोध बन गया।

इसी तरह ईरान के गायक अली जंदवाकिली रेलवे ट्रैक के किनारे गाते नजर आए, जबकि विश्वविद्यालय पर हमले के बाद एक प्रोफेसर ने मलबे के बीच बैठकर ऑनलाइन क्लास ली। यह दर्शाता है कि किसी देश की असली शक्ति उसकी जनता की मानसिक दृढ़ता होती है।

राजनीतिक स्तर पर भी यह जज्बा दिखा। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशिकयान ने स्पष्ट कहा कि वे देश के लिए जान देने को तैयार हैं। वहीं अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दी गई कड़ी चेतावनियों के बावजूद ईरान की जनता पीछे नहीं हटी।

इतिहास में अक्सर देखा गया है कि युद्ध के समय लोग सुरक्षित स्थानों की तलाश करते हैं, लेकिन यहां एक अलग तस्वीर सामने आई—दुनिया के विकसित देशों में रह रहे कई ईरानी नागरिक अपने देश की रक्षा के लिए वापस लौट आए। यह राष्ट्रभक्ति का वह रूप है, जो आधुनिक समय में दुर्लभ होता जा रहा है।

ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के बारे में भी लेख में उल्लेख है कि उन्होंने विशेष सुरक्षा से इनकार करते हुए आम जनता के साथ खड़े रहने का निर्णय लिया। यह संदेश देता है कि नेतृत्व का असली अर्थ जनता के साथ खड़ा होना है, न कि विशेषाधिकारों में जीना।

इस पूरे घटनाक्रम में एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आता है—मानवता। ईरान ने अपने संदेशों में कई बार अमेरिकी जनता को अलग रखते हुए केवल राजनीतिक नेतृत्व की आलोचना की। यह दर्शाता है कि संघर्ष के बीच भी इंसानियत जिंदा रह सकती है।

अंततः, यह कहना गलत नहीं होगा कि ईरान ने केवल सैन्य या राजनीतिक स्तर पर नहीं, बल्कि सांस्कृतिक, मानवीय और नैतिक स्तर पर भी एक उदाहरण प्रस्तुत किया है। संकट के समय कला, शिक्षा, एकता और साहस के माध्यम से जवाब देना ही किसी भी सभ्य समाज की पहचान है।

ईरान का यह जज्बा दुनिया के लिए एक संदेश है—
विपरीत परिस्थितियों में भी यदि समाज एकजुट रहे, तो वह न केवल टिक सकता है, बल्कि और मजबूत होकर उभर सकता है।

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