लखनऊ, 02 अप्रैल, 2026। प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में गुरुवार को जन भवन स्थित गांधी सभागार में लखनऊ विश्वविद्यालय से संबद्ध शासकीय एवं वित्त पोषित महाविद्यालयों के प्रधानाचार्यों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
बैठक में प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय तथा उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी भी उपस्थित रहीं।
प्रगति रिपोर्ट और शैक्षणिक गतिविधियों की समीक्षा
बैठक में विश्वविद्यालय से संबद्ध 17 शासकीय तथा 33 वित्त पोषित महाविद्यालयों के प्राचार्यों ने अपने-अपने संस्थानों की विस्तृत प्रस्तुति दी। प्रस्तुतीकरण के दौरान महाविद्यालयों की प्रगति रिपोर्ट, फैकल्टी की स्थिति, शोध एवं प्रकाशन, विभिन्न समझौता ज्ञापन (एमओयू), खेल गतिविधियां, सामाजिक सहभागिता, पौधारोपण अभियान, नैक एवं एनआईआरएफ रैंकिंग, नामांकन प्रतिशत, प्लेसमेंट, रोजगार मेले, पुस्तकालय सुविधाएं तथा निर्माण कार्यों की प्रगति सहित कई विषयों पर जानकारी साझा की गई।
राज्यपाल ने महाविद्यालयों में शिक्षकों की संख्या, उनके द्वारा प्रकाशित पुस्तकों के अनुपात, खेल गतिविधियों में विद्यार्थियों की भागीदारी और शैक्षणिक भ्रमण की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों के फोटोग्राफ्स को जियो-टैगिंग के साथ सुरक्षित रखा जाए।
रिक्त पदों और संसाधनों को मजबूत करने पर जोर
आनंदीबेन पटेल ने महाविद्यालयों में सृजित पदों के सापेक्ष रिक्त पदों की स्थिति पर चिंता जताते हुए समयबद्ध नियुक्तियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने विद्यार्थियों की कम संख्या पर भी नाराजगी व्यक्त की और इसके कारणों का समाधान करने पर बल दिया।
उन्होंने लैब और कंप्यूटर कक्षों की स्थिति सुदृढ़ करने, शोध एवं अनुसंधान गतिविधियों को बढ़ाने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा देने के लिए शिक्षकों और विद्यार्थियों को सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश दिए।
नशा और स्वास्थ्य जागरूकता अभियान चलाने का आह्वान
राज्यपाल ने विशेष रूप से तंबाकू, नशा और ड्रग्स के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए गांव-गांव अभियान चलाने का आह्वान किया। साथ ही छात्रावास, किचन और कक्षाओं का नियमित एवं आकस्मिक निरीक्षण (सरप्राइज विजिट) करने के निर्देश भी दिए।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है, इसलिए उन्हें कौशल विकास, नवाचार और नेतृत्व क्षमता से जोड़ना आवश्यक है।
नैक मूल्यांकन और सीएसआर फंड के उपयोग पर जोर
राज्यपाल ने महाविद्यालयों को राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) मूल्यांकन में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रेरित किया, ताकि संस्थानों की गुणवत्ता का आकलन कर सुधार के अवसर प्राप्त हो सकें।
उन्होंने कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (सीएसआर) फंड के प्रभावी उपयोग पर जोर देते हुए स्थानीय उद्योगों और बैंकों से समन्वय स्थापित कर संसाधनों को बढ़ाने का सुझाव दिया। साथ ही आंगनबाड़ी, टीबी उन्मूलन और एचपीवी वैक्सीनेशन जैसे जनकल्याणकारी कार्यक्रमों में महाविद्यालयों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप सुधार की आवश्यकता
राज्यपाल ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप शैक्षिक ढांचे में आवश्यक सुधार लाने पर बल दिया और मंत्रियों व अधिकारियों से महाविद्यालयों की प्रगति की नियमित समीक्षा करने की अपेक्षा व्यक्त की।
इस अवसर पर प्रो. जे.पी. सैनी ने बताया कि विश्वविद्यालय के अंतर्गत लगभग 530 महाविद्यालय संबद्ध हैं और वर्तमान में करीब 40,000 छात्र विश्वविद्यालय में अध्ययनरत हैं। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक गुणवत्ता सुधार और नैक मूल्यांकन की तैयारियों के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
