ट्रेन प्रस्थान से आठ घंटे पहले तक टिकट रद्द करने पर नहीं मिलेगा रिफंड, रेलवे ने बदले नियम

नई दिल्ली, 24 मार्च। यात्रियों की सुविधा और टिकटों की कालाबाजारी पर रोक लगाने के उद्देश्य से भारतीय रेलवे ने टिकट रद्दीकरण और किराया वापसी के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को घोषणा करते हुए कहा कि अब ट्रेन के प्रस्थान करने से आठ घंटे पहले तक कन्फर्म टिकट रद्द कराने पर यात्रियों को कोई पैसा वापस नहीं मिलेगा।

मंत्री ने बताया कि वर्तमान में यह समय सीमा चार घंटे की है, जिसे बढ़ाकर आठ घंटे कर दिया गया है। नया नियम इस वर्ष 1 से 15 अप्रैल के बीच देशभर में लागू कर दिया जाएगा।

रेल मंत्री के अनुसार, टिकट रद्दीकरण के अन्य प्रावधानों में भी संशोधन किया गया है। अब ट्रेन के प्रस्थान करने से 24 घंटे से आठ घंटे पहले टिकट रद्द कराने पर यात्रियों को केवल 50 प्रतिशत राशि ही वापस मिलेगी, जबकि अभी यह अवधि 12 घंटे से चार घंटे के बीच है।

इसी प्रकार, ट्रेन के प्रस्थान समय से 72 घंटे से 24 घंटे पहले टिकट रद्द कराने पर कुल किराए में से 25 प्रतिशत राशि की कटौती की जाएगी। वहीं, 72 घंटे से अधिक पहले टिकट रद्द कराने पर प्रति यात्री निर्धारित शुल्क काटकर शेष पूरी राशि वापस कर दी जाएगी।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य अंतिम समय में टिकटों की खरीद-फरोख्त और एजेंटों द्वारा कालाबाजारी को हतोत्साहित करना है, जिससे वास्तविक यात्रियों को अधिक सुविधा मिल सके।

उन्होंने यह भी बताया कि संशोधित नियम पहले ही इस वर्ष जनवरी के उत्तरार्ध में कुछ नई ट्रेनों, जैसे वंदे भारत स्लीपर और अमृत भारत-2 में लागू किए जा चुके हैं। रेल मंत्रालय ने 16 जनवरी 2026 को अधिसूचना जारी कर रेलवे यात्री (टिकट रद्द करना और किराया वापसी) नियम, 2015 में संशोधन किया था।

इसके अलावा यात्रियों को अतिरिक्त सुविधाएं भी दी गई हैं। अब काउंटर से टिकट खरीदने वाले यात्री ट्रेन के प्रस्थान से 30 मिनट पहले तक अपनी यात्रा श्रेणी को उच्च श्रेणी में बदल सकेंगे। पहले यह सुविधा केवल पहले चार्ट बनने से पहले तक ही उपलब्ध थी। हालांकि, यह सुविधा ऑनलाइन टिकट लेने वाले यात्रियों के लिए लागू नहीं होगी।

रेल मंत्री ने यह भी बताया कि अब यात्री अपने चढ़ने वाले स्टेशन (बोर्डिंग स्टेशन) में बदलाव ट्रेन के निर्धारित प्रस्थान से 30 मिनट पहले तक कर सकेंगे। वर्तमान में यह सुविधा पहला चार्ट तैयार होने के बाद मिलती है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, बोर्डिंग स्टेशन बदलने से टिकट के किराए पर कोई अतिरिक्त प्रभाव नहीं पड़ेगा।

रेलवे के इस निर्णय को यात्रियों के हितों की सुरक्षा और टिकट व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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