शाहजहांपुर, 24 मार्च (RNN)। उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर की एक युवती ने शादी में खर्च होने वाली राशि को अपने व्यवसाय में निवेश कर न केवल आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है, बल्कि अपनी सेहत में सुधार कर समाज के लिए प्रेरणा भी बनी हैं।
यह कहानी शहर की मानसी मिश्रा (30) की है, जो अब युवतियों और महिलाओं के लिए एक आदर्श बन चुकी हैं। चार भाई-बहनों में सबसे छोटी और परास्नातक व बी.एड. की डिग्री प्राप्त मानसी ने दो वर्ष पहले विवाह न करने का निर्णय लेते हुए अपने माता-पिता से शादी के लिए रखी गई राशि को अपने भविष्य के निर्माण में लगाने का अनुरोध किया।
मानसी ने बताया कि उनके माता-पिता ने उनके निर्णय का समर्थन किया और उन्हें लगभग 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी, जिससे उन्होंने महिलाओं के लिए एक विशेष जिम की स्थापना की। उन्होंने कहा कि जीवन के इस महत्वपूर्ण मोड़ पर उन्होंने अपने सपनों को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ाया।
मानसी का फिटनेस की ओर सफर करीब चार वर्ष पहले शुरू हुआ, जब उनका वजन लगभग 100 किलोग्राम था और उन्हें थायरॉयड की समस्या का पता चला था। इसके बाद वह दिल्ली चली गईं, जहां उन्होंने दो वर्ष तक जिम में प्रशिक्षण लिया और नियमित अभ्यास से अपना वजन घटाकर लगभग 60 किलोग्राम कर लिया। इसके साथ ही उनकी स्वास्थ्य स्थिति में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ।
उन्होंने बताया कि शुरुआती दौर में उन्हें सामाजिक धारणाओं, वित्तीय जोखिम और पुरुष-प्रधान फिटनेस उद्योग में पहचान बनाने जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। आज वह एक सफल प्रशिक्षक के रूप में अपना स्वयं का फिटनेस केंद्र संचालित कर रही हैं, जहां केवल महिला प्रशिक्षकों को नियुक्त किया जाता है, ताकि महिलाओं को सुरक्षित और सहज वातावरण मिल सके।
मानसी के पिता अरविंद कुमार मिश्रा ने बताया कि बेटी के आत्मनिर्भर बनने के संकल्प को देखते हुए परिवार ने पूरा सहयोग दिया और आज उन्हें अपनी बेटी की उपलब्धि पर गर्व है। जिम में अभ्यास करने वाली एक सरकारी स्कूल की अध्यापिका मनाली ने कहा कि महिला प्रशिक्षकों की उपलब्धता के कारण उन्हें वहां एक सुरक्षित और पारिवारिक माहौल का अनुभव होता है।
वहीं, रानी लक्ष्मी बाई महिला शाखा की संस्थापक डॉ. नमिता सिंह ने कहा कि यह शहर के लिए गर्व की बात है कि एक बेटी ने पारंपरिक सोच से आगे बढ़कर आत्मनिर्भरता का रास्ता चुना और अन्य महिलाओं को भी अपने सपनों को साकार करने की प्रेरणा दी।
