गुरुग्राम, 18 मार्च : दो बार की ओलंपिक पदक विजेता भारतीय बैडमिंटन स्टार पी वी सिंधू ने उभरते खिलाड़ियों को पढ़ाई को प्राथमिकता देने की सलाह देते हुए कहा है कि केवल खेल पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है, क्योंकि एक चोट से पूरा करियर खत्म हो सकता है।
गुरुग्राम के डीपीएस इंटरनेशनल में आयोजित एक कार्यक्रम में शिक्षाविद देवयानी जयपुरिया के साथ बातचीत के दौरान सिंधू ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा, “आप पूरी जिंदगी खेल नहीं सकते। एक समय के बाद हर खिलाड़ी को रिटायर होना पड़ता है। इसलिए शिक्षा बेहद जरूरी है, जो जीवनभर आपके साथ रहती है।”
पूर्व विश्व चैंपियन सिंधू ने अपने करियर के कठिन दौर का जिक्र करते हुए बताया कि 2015 में बाएं पैर में ‘स्ट्रेस फ्रैक्चर’ के कारण उन्हें लंबे समय तक खेल से दूर रहना पड़ा था। उस समय उनके मन में यह सवाल भी उठा कि क्या वह दोबारा कोर्ट पर वापसी कर पाएंगी।
उन्होंने कहा कि खेल में चोट का खतरा हमेशा बना रहता है और यह कभी भी करियर को प्रभावित कर सकता है। “चोट बताकर नहीं आती। कभी भी लग सकती है और सर्जरी तक की नौबत आ सकती है। ऐसे में जरूरी है कि खिलाड़ी अपने भविष्य के लिए तैयार रहें,” उन्होंने कहा।
सिंधू ने राष्ट्रीय कोच पुलेला गोपीचंद की उस सलाह का समर्थन किया, जिसमें उन्होंने खिलाड़ियों के माता-पिता से बच्चों की शिक्षा पर ध्यान देने की अपील की थी।
उन्होंने कहा, “कोई भी सोने की चम्मच लेकर पैदा नहीं होता। मेहनत पढ़ाई और खेल दोनों में करनी पड़ती है। मैंने खुद एमबीए किया है, इसलिए जानती हूं कि ट्रेनिंग और पढ़ाई को साथ लेकर चलना आसान नहीं होता।”
सिंधू ने स्पष्ट किया कि खेल महत्वपूर्ण है, लेकिन इतना भी नहीं कि पढ़ाई को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया जाए। उन्होंने कहा कि समय के साथ खिलाड़ियों को यह समझ आता है कि शिक्षा ही उनका स्थायी सहारा है।
गौरतलब है कि सिंधू ने 2016 के ओलंपिक खेल में रजत पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया था, हालांकि उससे पहले चोट के कारण उनकी तैयारी प्रभावित हुई थी। इसके बावजूद उन्होंने शानदार वापसी कर सफलता हासिल की।
उन्होंने युवा खिलाड़ियों को संदेश देते हुए कहा कि खेल के साथ-साथ पढ़ाई को भी बराबर महत्व देना चाहिए, ताकि जीवन के हर पड़ाव के लिए तैयार रहा जा सके।
