घुसपैठियों को बचाने के लिए तृणमूल एसआईआर का विरोध कर रही : मोदी

कोलकाता, 14 मार्च। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को तृणमूल कांग्रेस पर ‘‘घुसपैठियों से बने अपने वोट बैंक को बचाने’’ के लिए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया का विरोध करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि राज्य में तृणमूल कांग्रेस के शासनकाल में बड़े पैमाने पर घुसपैठ की वजह से कई क्षेत्रों की जनसांख्यिकी बदल गई है।

प्रधानमंत्री ने यहां ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित एक रैली को संबोधित करते हुए राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने तृणमूल पर घुसपैठ को बढ़ावा देने, राज्य की जनसांख्यिकी को बदलने और संवैधानिक संस्थाओं का अपमान करने का आरोप लगाया।

उन्होंने दावा किया कि विधानसभा चुनाव से पहले ममता बनर्जी सरकार की ‘‘उल्टी गिनती शुरू हो गई है’’। पश्चिम बंगाल में इस वर्ष 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव होने की संभावना है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि घुसपैठ राज्य के लिए एक बड़ा सुरक्षा मुद्दा बन चुकी है और तृणमूल सरकार ने चुनावी लाभ के लिए इसे प्रोत्साहित किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई क्षेत्रों की जनसांख्यिकीय संरचना बदल गई है और कुछ स्थानों पर बंगाली हिंदू अल्पसंख्यक बन रहे हैं।

मोदी ने कहा, “तृणमूल कांग्रेस की बेरोकटोक घुसपैठ के कारण बंगाल के कई इलाकों की जनसांख्यिकी बदल गई है। तृणमूल जानबूझकर कई जगहों पर हिंदुओं को अल्पसंख्यक बना रही है।”

उन्होंने विधानसभा चुनाव को राज्य के भविष्य के लिए निर्णायक लड़ाई करार देते हुए कहा कि यह सिर्फ सरकार बदलने का चुनाव नहीं है, बल्कि ‘‘बंगाल की आत्मा को बचाने’’ की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि यह चुनाव ‘‘कट मनी’’ की व्यवस्था खत्म करने और भय के माहौल से मुक्ति पाने के लिए भी महत्वपूर्ण है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस एसआईआर प्रक्रिया का विरोध इसलिए कर रही है क्योंकि इससे अवैध मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा सकते हैं। उन्होंने कहा, “ये लोग एसआईआर का विरोध इसलिए करते हैं ताकि घुसपैठियों के नाम मतदाता सूची से न हटाए जा सकें और मतदाता सूची को शुद्ध न किया जा सके। वे तो मृत व्यक्तियों के नाम भी हटाने को तैयार नहीं हैं।”

एसआईआर प्रक्रिया के बाद जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष नवंबर में प्रक्रिया शुरू होने के बाद से मतदाताओं की संख्या का लगभग 8.3 प्रतिशत यानी 63.66 लाख नाम हटा दिए गए हैं। इससे राज्य में मतदाताओं की संख्या करीब 7.66 करोड़ से घटकर लगभग 7.04 करोड़ रह गई है।

इसके अलावा करीब 60.06 लाख मतदाताओं को ‘‘न्यायिक जांच के अधीन’’ श्रेणी में रखा गया है, जिनकी पात्रता आने वाले हफ्तों में कानूनी जांच के बाद तय की जाएगी।

विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के बाद 28 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद यह प्रधानमंत्री का पश्चिम बंगाल का पहला दौरा है।

प्रधानमंत्री ने तृणमूल कांग्रेस पर पड़ोसी देशों में धार्मिक उत्पीड़न के कारण भारत आए हिंदू शरणार्थियों को नागरिकता देने का विरोध करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “जब उत्पीड़ित हिंदू शरणार्थियों को नागरिकता देने की बात आती है तो तृणमूल इसका विरोध करती है, क्योंकि वह उन्हें अपना वोट बैंक नहीं मानती है।”

उन्होंने ममता बनर्जी सरकार पर हमला तेज करते हुए आरोप लगाया कि राज्य प्रशासन आपराधिक तत्वों के समर्थन से चलता है। मोदी ने कहा कि जबरन वसूली और ‘‘कट मनी’’ तृणमूल के आय के स्रोत बन गए हैं और ऐसे गिरोहों को मजबूत करने के लिए घुसपैठियों को लाया जाता है।

प्रधानमंत्री ने तृणमूल पर निर्वाचन आयोग जैसे संवैधानिक संस्थानों को निशाना बनाने का भी आरोप लगाया और कहा कि स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने वाली संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि अतीत में देश के सशस्त्र बलों पर भी संदेह जताया गया था और बालाकोट हवाई हमले (2019) के बाद भारतीय वायुसेना से सबूत मांगे गए थे।

मोदी ने कहा कि राज्य में ‘‘महा जंगलराज’’ चलाने वालों के लिए उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है और भाजपा ‘‘सबका साथ, सबका विकास’’ के सिद्धांत पर सरकार चलाएगी।

प्रधानमंत्री ने राजनीतिक धमकियों और हिंसा में कथित रूप से शामिल लोगों को चेतावनी देते हुए कहा कि उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि अपराधियों, घुसपैठियों और तुष्टीकरण की राजनीति करने वालों के लिए केवल एक ही जगह होगी—जेल।

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