नई दिल्ली, 13 मार्च । पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार रात अपने ईरानी समकक्ष सैयद अब्बास अराघची से टेलीफोन पर बातचीत की। क्षेत्रीय संकट शुरू होने के बाद पिछले दो सप्ताह में दोनों नेताओं के बीच यह चौथी बातचीत है।
यह बातचीत ऐसे समय हुई है जब भारत होर्मुज जलडमरूमध्य के दोनों ओर खड़े 28 भारतीय व्यापारिक जहाजों के लिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने के प्रयास तेज कर रहा है। अमेरिका और इज़राइल के साथ बढ़ते तनाव के बाद ईरान ने इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को आंशिक रूप से अवरुद्ध कर दिया है।
इससे पहले जयशंकर और अराघची के बीच 28 फरवरी को बातचीत हुई थी, जब ईरान पर अमेरिका और इज़राइल द्वारा हमले किए जाने की खबर सामने आई थी। इसके बाद दोनों नेताओं ने 5 मार्च और 10 मार्च को भी चर्चा की थी।
जयशंकर ने सोशल मीडिया पर बताया कि बातचीत के दौरान द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ ब्रिक्स से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
ईरान की ओर से जारी बयान के अनुसार, अराघची ने भारत को क्षेत्र में उत्पन्न ताज़ा स्थिति और उसके वैश्विक सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ईरान अपने आत्मरक्षा के वैध अधिकार का प्रयोग करने के लिए दृढ़ संकल्पित है।
बयान में यह भी कहा गया कि अराघची ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मंचों पर निंदा किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने ब्रिक्स जैसे बहुपक्षीय मंचों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि वर्तमान समय में यह संगठन क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता को बढ़ावा देने में रचनात्मक भूमिका निभा सकता है।
इस बीच विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक अंतर-मंत्रालयी प्रेस वार्ता में कहा कि भारत सभी पक्षों से संवाद और कूटनीति के माध्यम से जल्द से जल्द समाधान निकालने की अपील कर रहा है। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर सहमति बनाने के लिए ब्रिक्स सदस्य देशों से भी बातचीत की जा रही है।
