शाहजहांपुर। जनपद में लंबे समय से चले आ रहे हरदोई–शाहजहांपुर सीमा विवाद के समाधान के लिए प्रशासन ने प्रभावी पहल करते हुए संयुक्त पैमाइश कराई, जिससे विवादित भू-भाग का स्पष्ट सीमांकन सुनिश्चित किया गया। अपर जिलाधिकारी अरविंद कुमार के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई को स्थानीय स्तर पर महत्वपूर्ण प्रशासनिक हस्तक्षेप माना जा रहा है।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, सीमा निर्धारण को लेकर दोनों जनपदों के बीच कई वर्षों से भ्रम और असहमति की स्थिति बनी हुई थी, जिसके कारण स्थानीय किसानों और ग्रामीणों को भूमि स्वामित्व, राजस्व अभिलेख और प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। इसी पृष्ठभूमि में संयुक्त राजस्व टीम का गठन कर विवादित क्षेत्र में व्यापक स्तर पर नापजोख कराई गई।
पैमाइश के दौरान शाहजहांपुर की सदर तहसील के राजस्व अधिकारियों के साथ हरदोई जनपद की शाहाबाद तहसील के अधिकारी भी मौके पर उपस्थित रहे। दोनों पक्षों की संयुक्त टीम ने राजस्व अभिलेखों, नक्शों और स्थल की भौतिक स्थिति का मिलान कर वास्तविक सीमांकन निर्धारित किया। अधिकारियों ने बताया कि तकनीकी मानकों और अभिलेखीय साक्ष्यों के आधार पर सीमारेखा स्पष्ट की गई, जिससे भविष्य में विवाद की संभावना न्यूनतम हो जाएगी।
अपर जिलाधिकारी अरविंद कुमार ने बताया कि निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाते हुए सीमांकन कार्य संपन्न किया गया है। उन्होंने संबंधित राजस्व अधिकारियों को निर्देश दिए कि सीमांकन से जुड़े सभी दस्तावेजों को अद्यतन कर सुरक्षित रखा जाए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की प्रशासनिक या कानूनी जटिलता उत्पन्न न हो। साथ ही उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण और निगरानी बनाए रखी जाएगी।
स्थानीय ग्रामीणों और किसानों ने प्रशासन की इस पहल का स्वागत करते हुए राहत की सांस ली है। उनका कहना है कि सीमा को लेकर लंबे समय से चल रही अनिश्चितता के कारण भूमि उपयोग, निर्माण कार्य और सरकारी योजनाओं के लाभ लेने में बाधाएं उत्पन्न हो रही थीं। स्पष्ट सीमांकन से न केवल विवाद समाप्त होगा, बल्कि विकास कार्यों को भी गति मिलेगी।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, सीमावर्ती क्षेत्रों में जनसुविधाओं और राजस्व सेवाओं के बेहतर संचालन के लिए दोनों जनपदों के अधिकारियों के बीच समन्वय तंत्र को भी मजबूत किया जाएगा। अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया कि आवश्यकता पड़ने पर सीमांकन संबंधी स्थायी चिह्न स्थापित किए जाएंगे, ताकि जमीन पर सीमारेखा स्पष्ट रूप से दिखाई दे।
जिले में इस कार्रवाई को विवाद समाधान की प्रभावी मिसाल के रूप में देखा जा रहा है। प्रशासन का मानना है कि संयुक्त समन्वय और अभिलेखीय साक्ष्यों पर आधारित निर्णय ही स्थायी समाधान का आधार बनते हैं। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि अब सीमा को लेकर किसी प्रकार की असमंजस की स्थिति नहीं रहेगी और क्षेत्र में शांति व प्रशासनिक स्पष्टता कायम रहेगी।
