भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते पर राहुल गांधी का हमला, सरकार पर दबाव में निर्णय लेने का आरोप

भोपाल, 24 फरवरी (Agency)। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को आरोप लगाया कि नरेन्द्र मोदी ने दबाव में आकर भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते को मंजूरी दी है। कांग्रेस द्वारा आयोजित ‘किसान महाचौपाल’ को संबोधित करते हुए उन्होंने दावा किया कि यह करार देश के किसानों, घरेलू उद्योग और डेटा सुरक्षा के हितों के विरुद्ध है।

राहुल गांधी ने कहा कि प्रस्तावित व्यापार समझौता लंबे समय से लंबित था, लेकिन अचानक इसे मंजूरी दिए जाने के पीछे बाहरी दबाव काम कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका में उद्योगपति गौतम अदाणी से जुड़े मामलों और कथित ‘एप्स्टीन फाइल्स’ के संदर्भ में उत्पन्न परिस्थितियों ने सरकार को समझौते के लिए मजबूर किया। उन्होंने प्रधानमंत्री को चुनौती देते हुए कहा कि यदि सरकार देशहित में काम कर रही है तो इस करार को रद्द कर स्पष्ट संदेश दे।

कांग्रेस नेता ने कहा कि यह समझौता भारतीय कृषि और कपड़ा उद्योग के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। उनके अनुसार यदि आयात और शुल्क से जुड़े प्रावधान लागू होते हैं तो घरेलू उत्पादन प्रभावित होगा और किसानों की आय पर नकारात्मक असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि भारत कपास उत्पादन में आत्मनिर्भर है, ऐसे में बाहरी आयात व्यवस्था घरेलू बाजार संतुलन को बिगाड़ सकती है।

राहुल गांधी ने डेटा सुरक्षा के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी की वैश्विक अर्थव्यवस्था में डेटा सबसे महत्वपूर्ण संसाधन बन चुका है और भारत के पास विशाल डिजिटल क्षमता है। उनका आरोप था कि प्रस्तावित व्यवस्था में भारत की डेटा संप्रभुता से समझौता किया गया है, जिससे भविष्य में रणनीतिक और आर्थिक जोखिम उत्पन्न हो सकते हैं।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि समझौते को केंद्रीय मंत्रिमंडल में व्यापक चर्चा के बिना मंजूरी दी गई। राहुल गांधी ने कहा कि किसी भी महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय आर्थिक समझौते पर व्यापक नीति विमर्श आवश्यक होता है, क्योंकि उसका प्रभाव दीर्घकालिक और बहुआयामी होता है।

कार्यक्रम के दौरान उन्होंने संसद से जुड़े मुद्दे भी उठाए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान उन्हें बोलने का अवसर नहीं दिया गया। उन्होंने पूर्व सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे से संबंधित संदर्भ का उल्लेख करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा और निर्णय प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए।

सभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह व्यापार समझौता किसानों के हितों के प्रतिकूल है और विपक्ष इसे जनहित का मुद्दा बनाकर उठाता रहेगा। उन्होंने सरकार से स्पष्ट नीति और पारदर्शिता की मांग की।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि देश के कृषि, उद्योग और डिजिटल क्षेत्र से जुड़े व्यापक हितों को ध्यान में रखकर ही किसी भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार व्यवस्था को अंतिम रूप दिया जाना चाहिए। पार्टी ने संकेत दिया कि वह इस मुद्दे पर देशभर में जनजागरण कार्यक्रम चलाएगी।

इस बीच केंद्र सरकार की ओर से इन आरोपों पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई है और आने वाले समय में यह विषय संसद और सार्वजनिक विमर्श में प्रमुख रूप से उठने की संभावना जताई जा रही है।

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