नयी दिल्ली। पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम. एम. नरवणे के अप्रकाशित संस्मरणों को लेकर लोकसभा में उत्पन्न विवाद पर कांग्रेस नेता शशि थरूर ने सरकार पर तीखा निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि सरकार की अतिशयोक्तिपूर्ण प्रतिक्रिया के कारण सदन की कार्यवाही बाधित हुई और सवाल उठाया कि आखिर सरकार चर्चा से क्यों डर रही है।
लोकसभा में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को जनरल नरवणे के अप्रकाशित संस्मरणों का हवाला देने से रोके जाने के बाद पैदा हुए विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए थरूर ने कहा कि सरकार की ओर से बिना किसी ठोस कारण के जरूरत से ज्यादा प्रतिक्रिया दी गई। उन्होंने कहा कि जिस विषय को राहुल गांधी उठाना चाहते थे, वह पहले से ही सार्वजनिक क्षेत्र में मौजूद है।
तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद थरूर ने स्पष्ट किया कि राहुल गांधी ने ‘कारवां’ पत्रिका में प्रकाशित एक लेख के आधार पर अपनी बात रखी थी, जिसमें जनरल नरवणे के अप्रकाशित संस्मरणों का उल्लेख है। उन्होंने कहा कि पत्रिका में प्रकाशित सामग्री सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है और उसे कोई भी व्यक्ति पढ़ सकता है।
थरूर ने कहा, “सरकार को इस बात पर आपत्ति जताने के बजाय कि वह पुस्तक अभी प्रकाशित नहीं हुई है, राहुल गांधी को अपनी बात रखने देना चाहिए था। उन्होंने जो लेख पढ़ा है, वह पहले से ही सार्वजनिक मंच पर मौजूद है। मैंने स्वयं उसे पढ़ा है और अन्य लोग भी उसे पढ़ रहे हैं।”
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि सरकार की जरूरत से ज्यादा प्रतिक्रिया के चलते बिना किसी आवश्यकता के संसद की कार्यवाही ठप करनी पड़ी। उन्होंने कहा कि यह स्थिति टाली जा सकती थी।
थरूर ने कहा, “मेरे विचार में संसद के लिए यह अधिक उचित होता कि चर्चा को आगे बढ़ने दिया जाता, क्योंकि संसद का मूल उद्देश्य ही मुद्दों पर चर्चा करना है।”
इस पूरे घटनाक्रम के बाद संसद के दोनों सदनों में हंगामे का माहौल देखने को मिला और कार्यवाही बाधित हुई, जिससे महत्वपूर्ण विधायी कार्य भी प्रभावित हुआ।
