एटा/हाथरस (उप्र), 29 जनवरी । सरकार की नीतियों और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों के विरोध में हाल ही में इस्तीफा देने वाले बरेली के पूर्व नगर मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने यूजीसी नियमों पर उच्चतम न्यायालय द्वारा रोक लगाए जाने को “लोकतंत्र और राष्ट्र की आत्मा की जीत” करार दिया है।
अलंकार अग्निहोत्री ने बृहस्पतिवार को हाथरस में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि यह फैसला न्यायपालिका के माध्यम से लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का प्रतीक है। उन्होंने कहा, “आज का दिन लोकतंत्र और राष्ट्र की आत्मा की जीत का दिन है। यह जीत न्यायपालिका ने दिलाई है।”
उल्लेखनीय है कि अग्निहोत्री ने सरकार की नीतियों और यूजीसी के हालिया नियमों का विरोध करते हुए गत सोमवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि, राज्य सरकार ने उनका इस्तीफा स्वीकार न करते हुए उन्हें अनुशासनहीनता के आरोप में निलंबित कर दिया।
इस बीच, उच्चतम न्यायालय ने यूजीसी के नए नियमों को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर बृहस्पतिवार को सुनवाई करते हुए उन पर अंतरिम रोक लगा दी। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने इस मामले में केंद्र सरकार और यूजीसी को नोटिस जारी किया।
याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि यूजीसी ने जाति-आधारित भेदभाव की एक गैर-समावेशी परिभाषा अपनाई है, जिससे कुछ सामाजिक वर्गों को संस्थागत संरक्षण से बाहर कर दिया गया है।
उधर, एटा के शहीद पार्क इलाके में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अग्निहोत्री ने कहा कि उनके फैसले किसी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से नहीं, बल्कि सिद्धांतों और संवैधानिक मूल्यों पर आधारित हैं। उन्होंने दावा किया कि उन्हें झूठे मामलों में फंसाने की तैयारी की जा रही है, लेकिन वे जनता से जुड़े मुद्दों को उठाते रहेंगे।
अग्निहोत्री ने प्रयागराज में माघ मेले के दौरान पुलिस और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के बीच हुए विवाद का भी उल्लेख किया और आरोप लगाया कि शिष्यों के साथ किया गया कथित दुर्व्यवहार सनातन धर्मियों का गंभीर अपमान है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इस तरह का व्यवहार सामाजिक रूप से स्वीकार्य हो सकता है।
यूजीसी के विवादित नियमों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि ये नियम भेदभावपूर्ण हैं और इनके तहत सामान्य श्रेणी के लोगों को पहले से ही अपराधी के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि कई सांसदों को कानूनी प्रावधानों का बुनियादी ज्ञान तक नहीं है और संसद तथा विधानसभाओं में पर्याप्त बहस के बिना कानून पारित कर दिए जाते हैं।
सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए अग्निहोत्री ने उसे एक “कॉर्पोरेट इकाई की तरह काम करने वाला दल” बताया और सभी समुदायों से इन कानूनों के खिलाफ एकजुट होने तथा अपने जनप्रतिनिधियों से जवाब मांगने की अपील की।
हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका किसी भी राजनीतिक दल में शामिल होने या नई पार्टी बनाने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें ब्राह्मण और सामान्य श्रेणी के विभिन्न संगठनों का समर्थन मिल रहा है।
